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वृंदावन नाव हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत—7 एक ही परिवार के, 4 अभी भी लापता

मथुरा के वृंदावन में नाव हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। अब तक 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। जबकि, 4 लोग लापता हैं। शनिवार को दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। आर्मी समेत 250 लोगों की टीम इस ऑपरेशन में लगी हुई है। 14 किमी के दायरे में लापता लोगों की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू में जुटे अफसर ने बताया कि यमुना का बहाव तेज है, इसलिए लोग बहकर दूर जा सकते हैं। नदी में गाद (कीचड़) और रेत में शव दबे हो सकते हैं। 24 घंटे बाद शव फूलकर ऊपर आ सकते हैं।

हादसा शुक्रवार दोपहर 3 बजे केसी घाट पर हुआ, जहां 37 श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई थी। घाट बांके बिहारी मंदिर से करीब 2 किमी दूर है। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं।जिस जगह हादसा हुआ, वहां 25 फीट गहरा पानी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि नाव की क्षमता 40 श्रद्धालुओं की थी। किसी भी श्रद्धालु को नाविक ने लाइफ जैकेट नहीं दी थी। पांटून पुल की रिपेयरिंग कर रहे लोगों और अन्य नाविकों ने कुछ लोगों को बचाया। बाद में प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू शुरू किया।

नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा करीब 40kmph स्पीड से चल रही थी। तेज हवा से नाव अचानक डगमगाने लगी। नाविक कंट्रोल खो बैठा। पर्यटकों ने नाविक से कहा, पुल आने वाला है, रोक लीजिए। लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार नाव टकराने से बची। तीसरी बार में टक्कर हो गई और नाव डूब गई।

पुलिस ने आरोपी नाविक पप्पू निषाद को हादसे के 6 घंटे बाद यानी शुक्रवार रात 9 बजे हिरासत में लिया। नाव उसकी खुद की थी। उसने श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था। हादसे के बाद फरार हो गया था।

इन सभी श्रद्धालुओं की मौत 👇

हादसे से जुड़े 2 वीडियो सामने आए हैं। पहला- नाव डूबने से 15 मिनट पहले का है, जिसमें लोग राधे-राधे जप रहे हैं। दूसरा- श्रद्धालुओं के नदी में डूबने का है। गुरुवार (9 अप्रैल) को लुधियाना के जगराओं के श्री बांके बिहारी क्लब की तरफ से 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को ले जाया गया था। जिसमें से 90 जगराओं से और बाकी अन्य शहरों से थे। वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी।

गुरुवार (9 अप्रैल) को लुधियाना के जगराओं स्थित श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को ले जाया गया था। इनमें से 90 श्रद्धालु जगराओं से थे और बाकी अन्य शहरों से। यह वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी।मृतकों में मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं।

वृंदावन में हुए नाव हादसे के बाद वाराणसी प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए गंगा घाटों पर सख्त इंतजाम किए गए हैं। अस्सी घाट से नमो घाट तक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है, नाविकों को ओवरलोडिंग न करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।

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