पंचकूला। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इसके तहत सभी सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। जिन स्कूलों में पानी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, वहां जरूरत के अनुसार RO या अन्य वाटर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 13 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में लिए गए निर्णय के बाद हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने और निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
जन स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से होगी जांच
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में उपलब्ध पेयजल के नमूनों की जांच जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के समन्वय से की जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्कूलों में बच्चों को पीने के लिए उपलब्ध पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।
MIS पोर्टल पर अपलोड करनी होगी रिपोर्ट
पानी की जांच के बाद प्रत्येक स्कूल की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिन स्कूलों में पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलेगी, उनकी विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। जांच के नतीजों को स्कूल लॉगिन के माध्यम से MIS पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा।
पानी की गुणवत्ता खराब मिली तो लगेंगे RO
जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित स्कूलों में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। जहां पानी पीने योग्य नहीं पाया जाएगा, वहां स्थिति के अनुसार RO सिस्टम या अन्य उपयुक्त वाटर प्यूरीफिकेशन व्यवस्था की जाएगी।
इससे स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
स्वच्छता एक्शन प्लान के बजट से होगा खर्च
निर्देशों के अनुसार, पानी की जांच पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली वार्षिक स्कूल ग्रांट के ‘स्वच्छता एक्शन प्लान’ की 10 प्रतिशत राशि से किया जाएगा।
अधिकारियों को समन्वय बनाकर करनी होगी कार्रवाई
हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने अतिरिक्त उपायुक्तों (ADC), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) और समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों (DPC) को आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय सीमा में समेकित रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपनी होगी।
इस व्यवस्था के तहत स्कूलों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच, रिपोर्टिंग और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सके।
