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इफको नैनो यूरिया उपयोग एंव महत्व पर बृहद किसान गोष्ठी का हुआ आयोजन!!

इफको झज्जर द्वारा संवाद भवन, झज्जर में इफको नैनो यूरिया उपयोग एंव महत्व पर बृहद किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एडीसी श्री जग निवास जी मुख्य अतिथि रहे व कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ इन्द्र सिंह, उप मंडल कृषि अधिकारी झज्जर ने की। अन्य विशिष्ट अतिथि श्री बीरेंद्र सिंह, सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समिति झज्जर डॉ देवी दयाल, मुख्य प्रबंधक, इफको चंडीगढ़, श्री ईश्वर सिंह, टीए, कृषि विभाग, श्री साहिल, क्षेत्रीय अधिकारी, इफको झज्जर, श्री निर्दोष पाल, (टी.एम.ई.) इफको-एम.सी. झज्जर समेत कुल 150 प्रगतिशील किसानों ने शिरकत की ।

कार्यक्रम की शुरुआत में श्री साहिल जी ने सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा की। इफको एम.सी. से श्री निर्दोष पाल जी ने एग्रो कैमिकल व विभिन्न फसलों में कीट प्रबन्धन के बारे में किसानों को जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगनिवास, एडीसी झज्जर ने अपने संबोधन में नैनो यूरिया को एक नई खोज बताया जो किसानों को अपनी आय दोगुनी करने में मददगार साबित होगी। इफको नैनो यूरिया के प्रचार के लिए ज्यादा से ज्यादा जागरूकता अभियान चलाने की जरुरत पर बल दिया ताकि ये किसानों के बीच जल्द पहुंच सके ।

बतौर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ इंद्र सिंह ने कहा कि इफको नैनो यूरिया परंपरिक दानेदार यूरिया की जगह विकल्प के तौर पर इजाद हुआ है और किसान इसको सभी फसलों में इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होने धान की सीधी बिजाई डी एस आर को बढ़ाने पर जोर दिया जिस से भविष्य में आने वाले जल संकट से बचा जा सके। श्री बीरेंद्र सिंह ने सरकारी समितियों द्वारा किसान हितैषी योजनाओं व चल रही सहकारी स्कीमों के बारे में किसानों को अवगत कराया।कार्यक्रम में आगे श्री ईश्वर सिंह ने कृषि विभाग की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं के बारे किसानों को अवगत कराया। इसके उपरांत डॉ देवी दयाल ने इफको की कार्यशैली पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि इफको लगातार किसानों के बीच अपनी सेवाएं देती रही है। जिस में किसान सभा, कंबल वितरण, सामाजिक कार्यक्रम, नीम पौधारोपण, मृदा परीक्षण अभियान आदि किसान हित में कार्यक्रम प्रदेश भर में चला रही है।

नैनो यूरिया की 500 मी.ली. की एक बोतल का प्रयोग पारंपरिक यूरिया के 45 कि.ग्रा. के एक बैग को प्रभावी ढंग से प्रतिस्थापित कर सकता है जिससे परंपरागत यूरिया की आवश्यकता 50% या उससे अधिक कम हो जाती है। नैनो यूरिया (तरल) नाइट्रोजन के लक्षित और सटीक अनुप्रयोग के लिए एक नवीन उर्वरक के रूप में उभरा है। इसे आसानी से ले जाया जा सकता है तथा जो परंपरागत यूरिया से अधिक कारगर है जिसकी उपयोगिक दक्षता केवल 25 प्रतिशत है बाकी 75 प्रतिशत भूमिगत जल व वातावरण प्रदूषित करता है। कार्यक्रम के दौरान श्री विकास (प्रगतिशील किसान,गांव- मदाना, झज्जर) ने भी नैनो यूरिया पर अपना उत्कृष्ट अनुभव अन्य किसान साथियों के साथ सांझा किया। अंत में श्री साहिल, क्षेत्रीय अधिकारी, इफको झज्जर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथि गणों का धन्यवाद किया।

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