इस देश को आजाद करवाने के लिए बहुत सी कुर्बानियां दी गईं। उसके बाद इस देश में प्रजातंत्र की स्थापना हुई। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री बयान दे रहे हैं कि लठ उठा लो। एक जिम्मेदार पद पर बैठकर ऐसी बात करना प्रजातंत्र पर चोट है। पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने रविवार को करनाल के एसबीएस स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर निशाना साधते हुए यह बात कही।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सबने कहा कि, “भाई दो साल हो गए हैं। अब तो बाहर निकालो और हम लोगों के हक की लड़ाई लड़ो। इसलिए अब घर से निकला हूं और यहां से शुरूआत की है।’ उन्होंने कहा कि आपसे इजाजत लेने के बाद अब भाजपा-जजपा की सरकार से दो हाथ करेंगे। हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपना बयान वापस ले लिया, तो मैं उसकी चर्चा नहीं करुंगा। लेकिन आप लोगों से यह कहने नहीं आया हूं की लठ उठा लो लेकिन एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि समय आने पर वोट से जवाब जरूर दीजिए। इससे बड़ी चोट कोई नहीं होती। लठ का दर्द तो दो दिन में ठीक हो जाएगा लेकिन वोट की चोट पांच साल रहेगी। ऐसे बयान देने वालों को पांच साल की चोट मारें। मैं आपसे यही पूछने आया हूं कि यदि आपको मंजूर हो तो पूरे हरियाणा में घूमेंगे। नवंबर के पहले सप्ताह में ऐसा ही कार्यक्रम जींद में आयोजित होगा।

हुड्‌डा ने कहा कि अब आम जन के द्वार जाएंगे और उनकी समस्याओं को सुनकर क्षेत्रीय मुद्दों को इकट्ठा करेंगे। करनाल में बहुत से भाइयों, व्यापारियाें, कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। कांग्रेस इन समस्याओं को विधानसभा सत्र में रखेगी और सरकार को घेरेगी। हर विधानसभा क्षेत्र में ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

पूर्व CM हुडा ने कहा कि लोगों ने हमें विपक्ष की जिम्मेदारी दी है। भाजपा-जजपा की सरकार बनी पर ये गठबंधन नहीं बल्कि मौका परस्ती है। चुनाव के दौरान एक दल कहता था कि हम 75 पार करेंगे, दूसरा दल कहता था हम इन्हें यमुना पार करेंगे। विकास के लिए नहीं, खुद के विकास के लिए गठबंधन हुआ। हमने भी दो साल का समय दिया। प्रदेश 2014 में प्रति व्यक्त आय, प्रति व्यक्ति निवेश में नंबर वन था और आज बेरोजगारी में नंबर एक हो गया है। अपराध में बहुत तेजी आ रही है। किसान को एमएसपी नहीं मिल रहा। मजदूर को मजूदरी नहीं मिल रही। कर्मचारी परेशान हैं।

हुडा ने कहा कि ऐलनाबाद में भाजपा के जो उम्मीदवार हैं, वो चार दिन पहले ही पार्टी में आए। इनेलो के अभय चौटाला ने उस समय इस्तीफा दिया था जब भाजपा के खिलाफ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। दोनों की मिलीभगत थी। बाहर आकर बयान दिया कि 3 नए कृषि कानूनों के पक्ष में इस्तीफा दे रहे हैं। अब क्या कानून वापस हो जो फिर चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे तो अभय चौटाला के जीतने का चांस नहीं है। किसी तरह जीत भी गए तो कांग्रेस के दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाने पर फिर इस्तीफा दे देंगे। ऐलानाबाद उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पक्की है।

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