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भूपेंद्र हुड्डा बोले- सरकार को ‘हुड्डा’ नाम से आपत्ति:नाम बदलने से नीयत नहीं बदलती, लॉटरी सिस्टम खत्म कर डीलरों को पहुंचा रही फायदा

रोहतक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें “हुड्डा” नाम से ही आपत्ति है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई HUDA (हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी) योजना के तहत लोगों को पारदर्शी तरीके से लॉटरी के माध्यम से प्लॉट दिए जाते थे। लेकिन भाजपा सरकार ने सिर्फ इस वजह से योजना का नाम बदल दिया क्योंकि इसमें “हुड्डा” नाम शामिल था।

हुड्डा ने मजाकिया अंदाज़ में कहा कि “HUDA” का मतलब है हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी, जबकि “मैं हूडा (HOODA) हूं हरियाणा ओवरऑल डेवलपमेंट अथॉरिटी”। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से विकास की नीयत नहीं बदलती, लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ नाम बदलने की राजनीति कर रही है। अब इस योजना का नाम बदलकर HSVP (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) कर दिया गया है।

रोहतक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार प्रॉपर्टी डीलरों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय लॉटरी सिस्टम के जरिए जरूरतमंदों को प्लॉट आवंटित किए जाते थे, जिससे पारदर्शिता बनी रहती थी और गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं रहती थी।

लेकिन भाजपा सरकार ने लॉटरी सिस्टम खत्म कर ऑक्शन की व्यवस्था लागू कर दी है। हुड्डा का कहना है कि यदि 50 प्लॉट होते हैं, तो सरकार उनमें से सिर्फ 6-7 प्लॉटों का ही ऑक्शन करती है, जिससे सिर्फ प्रॉपर्टी डीलरों को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में आम जरूरतमंद लोगों को अब प्लॉट नहीं मिलते, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए घर का सपना दूर होता जा रहा है।

भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कलेक्टरेट जो बढ़ाए गए है, उसका सबसे बड़ा असर मध्यम व गरीब वर्ग पर पड़ेगा। उनका अपना घर खरीदने का सपना केवल सपना ही बनकर रह जाएगा। सरकार ने एक योजना चला रखी है दीन दयाल के नाम से, जिसमें लोग प्लॉट खरीद लेते थे, लेकिन कलेक्टरेट बढ़ाने से अब उस योजना में भी प्लॉट नहीं खरीद सकेंगे।

भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार के कारण एचएसवीपी और एचएसआईआईडीसी घाटे में जा रही है। कोई नया सेक्टर सरकार ने नहीं बनाया। नई आईएमटी नहीं बना पाई। 80 से 90 चावल मील हरियाणा से जा चुकी है। इंडस्ट्री एरिया के रेट बढ़ाए गए हैं, जिसके कारण इंडस्ट्री भी बाहर जा रही है। ऐसे में घाटा तो होगा ही। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।

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