हिंदू धर्म में वसंत पंचमी का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। बसंत ऋतु को सभी 6 ऋतुओं में ऋतुराज के नाम से जाना जाता है। इस दिन देश के कई हिस्सों में पंतग भी उड़ाई जाती है, बसंत पंचमी के पर्व के अवसर पर विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इससे अलावा इस दिन कामदेव की भी आराधना होती है।
बसंत पंचमी पर ही ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था, इस कारण से बंसत पंचमी के दिन विधि-विधान से देवी सरस्वती की पूजा व आराधना की जाती है। बसंत पचंमी के दिन पीला वस्त्र और माथे पर पीला तिलक लगाया जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर जो बालक शिक्षा ग्रहण के लिए उनकी उम्र होने लगती है उन्हें इस तिथि से शिक्षा देने की प्रथा निभाई जाती है।
आइए जानते हैं कब है इस बार बसंत पंचमी का त्योहार और क्या है शुभ मुहूर्त।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का उद्भव हुआ था, इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा का विधान है’ बसंत पंचमी पर बड़ी ही धूमधाम के साथ सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन सभी शिक्षण संस्थानों में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करके उनकी पूजा की जाती है। देवी सरस्वती की पूजा के लिए सुबह 07 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच का समय सबसे शुभ रहेगा। बसंत पचंमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 05 फरवरी की दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 57 मिनट तक है।
बसंत पंचमी के दिन लोग अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करते है। इसके बाद शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस दिन सभी लोग पीला वस्त्र पहनते है क्योंकि देवी सरस्वती को पीला रंग बहुत ही प्रिय होता है। शुभ मुहूर्त के अनुसार मां की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं, स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, इस दिन एक दूसरे को लाल और पीले गुलाल लगाते हैं मां को पीले रंग की चीजों से भोग लगाया जाता है। इस दिन पीले रंग के मीठे चावल बना कर खाने का विधान है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह प्रकृति के उत्सव का भी पर्व भी माना जाता है। इस समय सर्दी और गर्मी का संतुलन होता है।
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