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बजरंग पूनिया के बड़े भाई ने दी पिता को मुखाग्नि:झज्जर में रेसलर ने अर्थी को कंधा दिया; खुद रेसलिंग न कर सके तो बेटे को ओलिंपियन बनाया

हरियाणा के ओलिंपियन रेसलर व अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। बजरंग के बड़े भाई हरेंद्र पूनिया ने पिता को मुखाग्नि दी।

उनकी पार्थिव देह शुक्रवार सुबह सोनीपत से झज्जर स्थित पैतृक गांव खुड्‌डन में लाई गई थी। यहां पर शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, इस दौरान परिजन रोते-बिलखते दिखे। इस दौरान रेसलर साक्षी मलिक के पति सत्यव्रत कादियान और बबीता फोगाट के पति विवेक सुहाग भी पूनिया के पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। हालांकि, अंतिम संस्कार में कांग्रेस के बड़े नेता नजर नहीं आए।

बता दें कि बलवान पूनिया ने गुरुवार शाम 6 बजे 71 साल की की उम्र में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। 18 दिन से वह अस्पताल में भर्ती थे। उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए थे।

बजरंग पूनिया के पिता बलवान पूनिया भी पहलवानी करते थे। मगर, आर्थिक हालात खराब होने के कारण वे अपना सपना पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने बजरंग को पहलवान बनाने की ठानी। 7 साल की उम्र से ही बजरंग को पहलवानी की प्रैक्टिस करानी शुरू कर दी। उन्होंने खुद भी बचपन से ही बजरंग को अखाड़े के गुर सिखाने शुरू कर दिए। उनकी इच्छा थी कि बेटा देश का नामी पहलवान बने, जो बजरंग ने ओलिंपिक तक पहुंचकर सच कर दिखाया।

बजरंग का परिवार अभी सोनीपत के मॉडल टाउन में रहता है। बलवान सिंह रोज सुबह घर के सामने कुर्सी डालकर बैठ जाते। आसपास के लोग उनसे मिलने आते और घंटों बातचीत करते। बलवान सिंह ने हमेशा सादा पहनावा अपनाया और अपने सरल स्वभाव से हर किसी को प्रभावित किया।

बजरंग पूनिया के पिता और भाई भी पहलवानी करते थे, लेकिन आर्थिक हालात खराब होने के कारण वे अपना सपना पूरा नहीं कर पाए। बलवान ने बचपन से ही बजरंग को अखाड़े के गुर सिखाने शुरू कर दिए। उनकी इच्छा थी कि बेटा देश का नामी पहलवान बने, जो बजरंग ने सच कर दिखाया।

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