रोहतक के गांव गरनावठी में स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के स्थानीय पशु विज्ञान केन्द्र व झज्जर के प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि लंपी त्वचा रोग की गंभीरता को देखते हुए सरकार व प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं । अभियान के तहत गांव गरनावठी व सुन्दरपुर में आयोजित शिविरों में लगभग 80 व्यक्तियों ने भाग लिया।
डॉ. राजेन्द्र सिंह ने गांव ग्रामीणों को बताया कि जिला में अन्य प्रान्तों की सीमा न लगने के कारण इस बीमारी का प्रकोप प्राय: कम देखने में आया है। उन्होंने कहा कि वे लम्पी त्वचा रोग से अपने पशुधन को बचाएं। हालांकि इससे डरने की जरूरत नहीं है बल्कि सावधानी बरतने की जरूरत है। यह वायरस जनित रोग मुख्यत गौवंश में पाया जाता है तथा भैंसों में यह रोग ना के बराबर है। यह वायरस गर्म व नम मौसम में मक्खी, मच्छर व चीचड़ आदि के काटने से फैलता है। उन्होंने पशुपालकों से कहा कि वे पशुओं के बाड़े को साफ-सुथरा रखें व नियमित रूप से मक्खी व मच्छररोधी दवाओं का प्रयोग करें। उन्होंने इस को लेकर गांव में पंपलेट भी बटवाएं और साथ ही पशुओं के लिए मच्छरदानी लगाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि लम्पी चर्म रोग के लक्षणों में बुखार आना, मूंह व नाक से स्त्राव निकलना, खाल के नीचे छोटी-छोटी गाठें बनना, कुछ पशुओं में गले के नीचे, गादी, छाती व पैरों में सूजन आदि शामिल हैं। उचित देखभाल व ईलाज से बीमार पशु दस से 15 दिनों में पूर्णत: स्वस्थ हो जाता है और दुग्ध उत्पादन भी सामान्य स्तर पर आ जाता है। स्वस्थ पशु का संक्रमित पशु के सम्पर्क में आने से भी रोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह रोग पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलता है। अत: घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि इस रोग के कारण पशु में मृत्यु दर एक प्रतिशत से भी कम है। फिर भी एहतियात के तौर पर मृत पशुओं को दो से ढाई मीटर गहरे गड्ढे में ही दफनाएं क्योंकि मृत पशु को खुले में छोडऩे से अन्य स्वस्थ पशुओं में संक्रमण फैल सकता है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नम्बर 93000-00857 व 94857-37001 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

