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रोहतक के माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में श्रद्धा व भक्तिभाव से भक्तजनों ने की भगवान गोवर्धन की परिक्रमा और पूजा अर्चना,साध्वी मानेश्वरी देवी ने संगतों को बताया गोवर्धन पूजन का महत्व


      रोहतक के माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री जी के सानिध्य में शनिवार को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को अन्नकूट यानि गोवर्धन पर्व पर भक्तों नेे गोवर्धन भगवान की प्रक्रिमा कर पूजा अर्चना की और सुख समृद्धि की कामनाएं कीं। तत्पश्चात भक्तों ने अन्नकूट (कड़ी, चावल व मिश्रित सब्जी) का प्रसाद छका। कार्यक्रम में साध्वी मानेश्वरी देवी जी के प्रवचन हुए। कार्यक्रम में पंडित अशोक शर्मा द्वारा आरती की गई। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।


भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था : साध्वी मानेश्वरी देवी


      गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी ने प्रवचन देते हुए बताया कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से इंद्रदेव की पूजा करने के बजाय गोवर्धन की पूजा करने को कहा। इससे पहले गोकुल के लोग इंद्रदेव को अपना इष्ट मानकर उनकी पूजा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से कहा कि गोवर्धन पर्वत के कारण ही उनके जानवरों को खाने के लिए चारा मिलता है। गोर्वधन पर्वत के कारण ही गोकुल में बारिश होती है, इसलिए इंद्रदेव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए। जब इंद्रदेव को श्रीकृष्ण की इस बात के बारे में पता चला तो उन्हें बहुत क्रोध आया और बृज में तेज बारिश शुरू कर दी, तब श्रीकृष्ण भगवान ने बृज के लोगों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर बृजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचा लिया। तब बृज के लोगों ने श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों की हमेशा रक्षा करने का वचन दिया था।


साध्वी मानेश्वरी देवी ने बताया कि गोवर्धन पूजा के दिन भगवान गोवर्धन और श्री कृष्ण की पूजा करने से जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। घर में मां लक्ष्मी का वास और गोवर्धन भगवान का आशीर्वाद मिलता है। घर में उन्नति, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

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