रोहतक स्थित अनाज मंडी के आढ़ती दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। अनाज मंडी में धरना देकर आढ़तियों ने रोष जताया और कहा कि सरकार उनकी मांगों को जल्द पूरा करे। मांग पूरी नहीं होने तक वे अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखेंगे। प्रदेश स्तर में चल रही हड़ताल को लेकर बुधवार को करनाल में पड़ाव डालेंगे। जहां सीएम सिटी में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
आढ़तियों ने कहा कि किसानों की सभी फसलें सरकार द्वारा MSP पर आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाए। साथ ही आढ़त पूरी 2.5 प्रतिशत मिलनी चाहिए, जो कि पिछले दो सीजन से गेहूं पर 246/ और धान पर 45.80 रुपये दी गई है, जो गलत है। इस मांग को लेकर बार-बार सरकार व अधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें पूरी आढ़त दिलवाई जाए।
आढ़तियों ने कहा कि पिछले वर्ष से ही MSP का भुगतान सीधे किसानों को दिया जाने लगा है। इससे आढ़तियों व किसानों में रोष है। उन्होंने मांग की कि सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली सभी फसलों का भुगतान किसान की इच्छा अनुसार आढ़ती या स्वयं किसान के खाते में अदा किया जाना चाहिए।
मार्केटिंग बोर्ड ने ई-नेम लागू करने के लिए आदेश जारी किए है। इस पर आढ़तियों से पहले भी चर्चा हो चुकी है कि प्राइवेट बिकने वाली फसलों पर यह प्रक्रिया लागू नहीं हो सकती। ई-ट्रेडिंग फिनिश्ड गुड्स की हो सकती है। जबकि मंडियों में आने वाली फसलें एक तरह से कच्चा माल है। इसलिए यह प्रक्रिया मंडियों में लागू नहीं की जाए। सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करने के बाद भी सरकार ने उनकी फसलें नहीं खरीदती। जबकि यह सभी सीमांत किसान कई वर्षों से मंडियों से जुड़े हैं।
न्यू ग्रेन मार्केट एसोसिएशन रोहतक के प्रधान मुकेश बंसल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मुलाकात की थी। लेकिन मांगों को पूरा नहीं किया गया। जिसके कारण पूरे प्रदेश में आढ़ती हड़ताल पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आढ़ती लाइसेंस को लेकर पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी लागू किया जाए। लाइसेंस फीस एकमुश्त दो या तीन हजार रुपये होनी चाहिए। निर्माण कार्य अधूरे हों तो उस पर पंजाब की तर्ज पर जुर्माना वसूल किया जाना चाहिए।
आढ़ती सतीश कुमार ने कहा कि सभी आढ़ती दो दिन से हड़ताल पर बैठे हैं। मुख्य मांग ई-नेम खरीद के विरोध में हैं। ई-नेम खरीद के माध्यम से जब जमीदार अनाज लेकर आएगा तो उसका सैंपल लिया जाएगा। उसके बाद पोर्टल पर डालकर खरीद करवाई जाएगी। ऐसे में कोई भी मिलर इतना सक्षम नहीं है कि वह पहले किसान को भुगतान कर दे और फिर माल उठाए। इस प्रक्रिया से अनाज भी खराब होगा और आढ़ती व किसान परेशान। सरकार तो 4 प्रतिशत फीस के लिए कर रही है। सरकार को किसान व आढ़तियों की समस्या से कोई लेना देना नहीं हैं।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष प्रीत सिंह ने कहा कि इस लड़ाई में अखिल भारतीय किसान सभा सांझी है। आढ़ती भी किसानों की लड़ाइ लड़ रहे हैं। सरकार जो नई शर्त लगा रही है। उन पर तुरंत रोक लगाकर पुरानी खरीद प्रणाली लागू करे। इस प्रणाली के लागू होने से किसान को यह तक पता नहीं चलेगा कि कौन-सी कंपनी उसकी उसका अनाज खरीद रही है। अब तक किसान आढ़ती के पास अनाज लाता है और अनाज डालते ही किसान पैसे लेकर चला जाता है। जो भी आंदोलन की रूपरेखा होगी, उसमें अखिल भारतीय किसान सभा कंधे-से-कंधा मिलकार लड़ाई लड़ेंगे।
