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661 करोड़ बैंक घोटाले में एक और IAS गिरफ्तार…CBI ने पंकज अग्रवाल को दबोचा

हरियाणा के बहुचर्चित 661 करोड़ रुपए के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। CBI ने प्रेस रिलीज जारी कर गिरफ्तारी की पुष्टि की है। हालांकि एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें कहां से गिरफ्तार किया गया। आज उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।

पंकज अग्रवाल फिलहाल हरियाणा सरकार में आर्किटेक्चर विभाग के प्रधान सचिव के पद पर तैनात हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक घोटाले के दौरान वह शिक्षा विभाग और कृषि विभाग में प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत थे।

CBI की जांच में सामने आया है कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के खाते चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा में नियमों के विपरीत खोले गए थे। बाद में इन खातों में तय सीमा से कहीं अधिक सरकारी धन ट्रांसफर किया गया।

आरोप है कि इन खातों के जरिए फर्जी लेनदेन कर सरकारी धन को ठिकाने लगाया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। CBI का दावा है कि जांच के दौरान पंकज अग्रवाल की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई।

पहले आरके सिंह भी हो चुके गिरफ्तार

इससे पहले CBI ने 18 जून को वरिष्ठ IAS अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि पंचकूला नगर निगम और कालका नगर परिषद से जुड़े सरकारी फंड के गबन में उनकी भूमिका सामने आई थी।

CBI के अनुसार जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरके सिंह ने कथित मास्टरमाइंड के साथ हुई कुछ चैट डिलीट कर दी थीं। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।

क्या है 661 करोड़ का घोटाला?

फरवरी 2026 में सामने आए इस घोटाले ने पूरे हरियाणा प्रशासन को हिला दिया था। जांच में खुलासा हुआ कि IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए करोड़ों रुपए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए।

मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने जांच CBI को सौंप दी। एजेंसी अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, निजी कंपनियां और कई निजी व्यक्ति शामिल हैं।

CBI के मुताबिक इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड IDFC फर्स्ट बैंक का तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि है, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

संपत्ति का भी खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

जांच के दौरान पंकज अग्रवाल की संपत्तियों का भी रिकॉर्ड खंगाला गया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने पिछले दो वर्षों में कोई नई संपत्ति नहीं खरीदी, हालांकि पंचकूला स्थित एक अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट में उनके निवेश में करीब 45 लाख रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

CBI अब इस मामले में धन के प्रवाह, प्रशासनिक मंजूरियों और अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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