रोहतक जिले के भालौठ गांव में उस समय मातम पसर गया जब गुरुग्राम में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए तीन युवकों के शव गांव पहुंचे। शव देखते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में शोक का माहौल है और लोगों को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि इस घटना में दो नाबालिग समेत तीन युवकों की जान चली गई। परिजनों और ग्रामीणों ने एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गुरुग्राम में एक व्यवसायी को कथित तौर पर दीपक नांदल गैंग के नाम से धमकियां मिल रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान हथियारों से लैस कुछ युवक स्कॉर्पियो में सवार होकर उसके घर पहुंचे और उसे बंधक बना लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपियों की घेराबंदी कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हुई मुठभेड़ में दर्जनों राउंड फायरिंग हुई, जिसमें तीन पुलिसकर्मी और एक आरोपी घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई। इनमें रोहतक जिले के भालौठ गांव के तीन युवक शामिल हैं, जिनमें दो नाबालिग और एक बालिग बताया गया है। तीनों के शव शनिवार शाम गांव पहुंचने पर शोक की लहर दौड़ गई और गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंकित की मां ने बिलखते हुए बताया कि वह चार बहनों का इकलौता भाई था। उसने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और नौवीं में दाखिला लिया था, लेकिन कुछ समय बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद वह अपने पिता के साथ ठेकेदार के पास मजदूरी करने जाने लगा। परिवार के अनुसार, अंकित इस बार हरिद्वार से कांवड़ लाने की जिद पर अड़ा था और इसके लिए पैसे भी जोड़ रहा था।
मां ने बताया कि 8 जुलाई को अंकित ने घर से ₹200 किराए के लिए मांगे और कहा कि बाकी पैसे उसने पहले से जमा कर रखे हैं। उसने परिवार से कहा था कि वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटेगा। उसी शाम वह घर से निकला, लेकिन वापस नहीं आया।
परिजनों के मुताबिक, 10 जुलाई की सुबह पुलिस का फोन आया और उन्हें सरपंच के घर बुलाया गया। मां ने बताया कि जब उसने जाने में असमर्थता जताई तो फोन करने वाले ने कहा कि “लाश देखने तो आना पड़ेगा।” यह सुनते ही परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद अंकित के पिता और अन्य परिजन सरपंच के घर पहुंचे, जहां उन्हें पुलिस मुठभेड़ में अंकित की मौत की सूचना दी गई।
अंकित के मामा जितेंद्र ने बताया कि अंकित नाबालिग था और अगले महीने ही अंकित का जन्मदिन भी था। अंकित अभी 17 साल का होने वाला था। अंकित कभी गलत कामों में नहीं रहा। बिना बताए कभी घर से दूर नहीं गया। ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह एक-दो दिन के लिए भी कभी कहीं गया हो और परिवार को पता ना हो। अब भी हरिद्वार का नाम लेकर घर से गया था।
जैवलिन थ्रो खिलाड़ी आर्यन के कोच सुनील फोगाट ने बताया कि आर्यन शांत और सरल स्वभाव का युवक था। वह रोजाना शाम को राजीव गांधी स्टेडियम पहुंचकर नियमित रूप से जैवलिन थ्रो का अभ्यास करता था। आर्यन ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया था। हालांकि वह कोई पदक नहीं जीत सका, लेकिन खेल के प्रति उसका समर्पण साफ दिखाई देता था।
कोच के अनुसार, आर्यन पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार अभ्यास कर रहा था। इस दौरान कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह किसी गलत संगत में पड़ गया हो। मैदान में उसका व्यवहार साथी खिलाड़ियों के साथ भी अच्छा रहता था। उन्होंने कहा कि वह किन परिस्थितियों में इस मामले में शामिल हुआ, इसका स्पष्ट पता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा
गांव के सरपंच कुलदीप ने बताया कि नितिन की गांव में ही बाइक ठीक करने की दुकान थी। पहले नितिन ने काम सीखा और उसके बाद खुद की दुकान कर ली थी। एक बार पहले भी कलावड़ में पुलिस ने किसी वारदात में शामिल होने का आरोप लगाते हुए पकड़ा था। लेकिन गांव के लोगों को कभी नितिन के स्वभाव से ऐसा नहीं लगा कि वह गलत काम करता है।
सरपंच कुलदीप ने बताया कि गांव के तीनों लड़कों को पुलिस ने गलत मारा है। पुलिस को उन्हें मौका देना चाहिए था। जान से मारने की बजाय उनके पैर में गोली मारकर पकड़ सकते थे। तीनों युवक किस लालच में आकर गैंगस्टर के चंगुल में फंसे हैं, यह तो जांच में ही पता चलेगा।

