नई दिल्ली। त्योहारों के सीजन में अमूल ने ग्राहकों को महंगाई का झटका दिया है। कंपनी ने घी और बटर की कीमतों में 3 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। अब एक किलो घी का कार्टन 630 रुपये के बजाय 680 रुपये में मिलेगा। वहीं, 100 ग्राम बटर के पैक की कीमत 63 रुपये से बढ़ाकर 66 रुपये कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि गुजरात और राजस्थान में नकली घी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद ब्रांडेड घी की मांग बढ़ी है। इससे सप्लाई पर दबाव पड़ा है। इसी बीच कंपनी ने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।
अमूल के घी और बटर के नए रेट
| प्रोडक्ट | पुरानी कीमत | नई कीमत | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| घी (1 किलो कार्टन) | ₹630 | ₹680 | ₹50 |
| प्योर घी (500 ग्राम पाउच) | ₹325 | ₹345 | ₹20 |
| बटर (100 ग्राम पैक) | ₹63 | ₹66 | ₹3 |
| बटर (500 ग्राम पैक) | ₹310 | ₹325 | ₹15 |
GST घटने के बाद 700 प्रोडक्ट हुए थे सस्ते
सितंबर 2025 में GST की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद अमूल ने अपने करीब 700 डेयरी उत्पादों के दाम कम किए थे। उस समय एक किलो घी के कार्टन की कीमत 650 रुपये से घटाकर 610 रुपये की गई थी। वहीं, पांच किलो घी का टिन 3,275 रुपये से घटकर 3,075 रुपये का हो गया था।
बटर के 100 ग्राम पैक की कीमत 62 रुपये से घटाकर 58 रुपये और 500 ग्राम पैक की कीमत 305 रुपये से घटाकर 285 रुपये कर दी गई थी।
गुजरात में अमूल काउ घी की सप्लाई प्रभावित
कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही गुजरात के कुछ शहरों में अमूल के डेयरी उत्पादों की उपलब्धता भी प्रभावित होने की खबर है। वडोदरा और अहमदाबाद के दुकानदारों के मुताबिक, घी का स्टॉक कम मिल रहा है। गणेश उत्सव के बाद मांग बढ़ने से काउ घी की सप्लाई पर असर पड़ा है।
अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके के एक डी-मार्ट आउटलेट में मंगलवार को अमूल घी और बटर का स्टॉक उपलब्ध नहीं था। इससे पहले पुणे और कोलकाता में भी सप्लाई प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई थीं।
नकली घी पर कार्रवाई के बाद बढ़ी ब्रांडेड घी की मांग
अमूल से जुड़े एक कोऑपरेटिव लीडर के अनुसार, गुजरात और राजस्थान में नकली घी के खिलाफ कार्रवाई के बाद ब्रांडेड घी की मांग तेजी से बढ़ी है। पिछले छह महीनों में दोनों राज्यों के अलग-अलग इलाकों से करीब 2 लाख किलो नकली घी जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
उनके मुताबिक, त्योहारों के सीजन में सालभर की कुल घी खपत का लगभग 45 प्रतिशत इस्तेमाल होता है। ऐसे में मांग बढ़ने से सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
