सोनीपत। सोनीपत नगर निगम में नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के नेता विमल किशोर ने स्थानीय लोगों के साथ नगर निगम आयुक्त को शिकायत देकर एक जूनियर इंजीनियर (JE) पर 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने, अभद्रता करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए जुलाई में आवेदन किया गया था, लेकिन करीब दो महीने बाद उसे रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद दोबारा आवेदन करने और नगर निगम आयुक्त से शिकायत करने के बावजूद आवेदक को कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उससे रिश्वत मांगी गई और बाद में उसके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दो महीने बाद रिजेक्ट कर दिया गया आवेदन
विमल किशोर की शिकायत के मुताबिक, 13 जुलाई 2026 को नई प्रॉपर्टी आईडी के लिए आवेदन संख्या 0502348742105 जमा किया गया था। करीब दो महीने बाद 12 सितंबर को आवेदन यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया गया कि पुरानी प्रॉपर्टी आईडी में नाम बदलवाया जाए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन के संबंध में नगर निगम के कई चक्कर लगाने के बाद जब उसकी मुलाकात जेई विपिक राणा से हुई, तो कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की गई।
विजिलेंस से संपर्क करने का भी दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रिश्वत मांगने के मामले में विजिलेंस से संपर्क करने के बाद शिकायतकर्ता रिकॉर्डिंग के लिए उपकरण लेकर दोबारा संबंधित जेई के पास पहुंचा। आरोप के अनुसार, जेई को उसके बारे में पता चल गया, जिसके बाद रिश्वत को लेकर बातचीत नहीं हुई। बाद में आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया।
हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोपों और इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
दोबारा आवेदन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
पहला आवेदन रिजेक्ट होने के बाद 13 सितंबर को आवेदन संख्या 0502349123902 के तहत दोबारा आवेदन किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पर भी समय पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 29 सितंबर को नगर निगम आयुक्त से मिलकर शिकायत दी गई।
शिकायत के मुताबिक, इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन आवेदक को कभी जेईटीओ तो कभी क्लर्क सहित अन्य कर्मचारियों के पास भेजा जाता रहा। आरोप है कि 26 अक्टूबर की रात करीब 8 बजे आवेदन पर डेवलपमेंट चार्ज की मांग लगाकर उसे लेवल-2 पर भेजा गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि आवेदन के साथ भवन का नक्शा पास होने की कॉपी और उसी इमारत की पहले से बनी नई प्रॉपर्टी आईडी के दस्तावेज भी जमा किए गए थे। इसके बावजूद अतिरिक्त चार्ज की मांग लगाए जाने पर उसने सवाल उठाए हैं।
अभद्रता और धमकी देने का आरोप
विमल किशोर के अनुसार, 27 अक्टूबर को उन्होंने जेई विपिक राणा से मिलकर आवेदन में हो रही देरी का कारण पूछा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान उनके साथ अभद्रता की गई और उन्हें धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इस घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग भी उसके पास मौजूद है। उसने 27 अक्टूबर को नगर निगम आयुक्त को डायरी संख्या R 9666 के तहत शिकायत देने की बात कही है।
पहले आवेदन को रिजेक्ट करने पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि आवेदन के दस्तावेज सही थे, तो पहला आवेदन दो महीने बाद रिजेक्ट क्यों किया गया? वहीं, यदि दस्तावेजों में कमी थी, तो उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बाद में प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी?
शिकायत के अनुसार, आयुक्त और एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर के समक्ष मामला उठाने के बाद आवेदन को मंजूरी मिली। शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि आवेदन को पहले रिजेक्ट करने के पीछे कोई अनुचित कारण तो नहीं था।
नगर निगम में जवाबदेही तय करने की मांग
विमल किशोर ने नगर निगम आयुक्त को दिए ज्ञापन में केवल अपने मामले की जांच ही नहीं, बल्कि आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने के लिए भी कई मांगें उठाई हैं।
- अधिकारियों और कर्मचारियों के जनता से मिलने का समय निर्धारित किया जाए।
- प्रत्येक कार्य के निपटारे की समय सीमा तय हो।
- काम में देरी के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा वाले CCTV कैमरे लगाने की मांग पर विचार किया जाए।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने नगर निगम आयुक्त से रिश्वत मांगने, अभद्रता करने और धमकी देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आवेदन को पहले रिजेक्ट करने और बाद में उसी दस्तावेजी आधार पर आगे बढ़ाने के कारणों की भी जांच करने को कहा है।
फिलहाल, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और जांच का आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
