अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की अष्टमी तिथि पर बड़े ही शुभ संयोग में आ रहा है। इस व्रत पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उन्नति, सुख-शांति व बौद्धिक विकास की कामना के लिए व्रत करती हैं। संतान के सुखी जीवन हेतु यह व्रत बड़ी ही निष्ठा व श्रद्धा भाव से किया जाता है। अहोई माता संतति सुख प्रदान करने वाली देवी हैं, इसके साथ-साथ इनका पूजन करने से और आज के दिन निर्जल व्रत रखने से संतान संबंधी कष्टों से छुटकारा मिलता है। यदि किसी कारणवश आपके बच्चे आपके कहने में नहीं हैं या फिर किसी प्रकार का दुर्भाग्य उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। आज के दिन देवी के चरणों में उनकी वंदना करते हुए निर्जल व्रत रखकर संध्या के समय उनका पूजन करने के बाद तारे को अर्घ्य देकर व्रत की समाप्ति करें। देवी की कृपा आप पर और आपकी संतान पर अवश्य होगी और इसके साथ ही सभी प्रकार के संतान संबंधी कष्ट दूर हो जाएंगे।
आज के दिन अहोई माता को काले उड़द की दाल से बने दही बड़ों का भोग लगाने से संतान के ऊपर चल रही नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं।
आज के दिन अहोई माता को जलेबी का भोग लगाने से संतान निरोगी व स्वस्थ जीवन जीती है।
अहोई माता को दो जोड़े में फल चढ़ाएं, जिसमें की ईख और भुट्टे का प्रयोग अवश्य करें, ऐसा करने से संतान के उन्नति के रास्ते सशक्त होते हैं।
संध्याकाल में अहोई माता के पूजन के पश्चात भगवान शंकर को यज्ञोपवीत चढ़ाते हुए उनका पूजन करें, ऐसा करने से संतान संस्कारी व आज्ञाकारी रहती है।

