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TTE का मर्डर करने के बाद बदमाश बीच सड़क पर ‘मित्रां नूं शौक हथियारां दा’ पर नाचते नजर आए

पानीपत में सनौली रोड पर बुधवार रात जहाँ सब एक तरफ दशहरा मेला का आनंद ले रहे थे तो वहीं कुछ बदमाशों ने एक रेलवे TTE की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। मिली जानकारी के अनुसार हनुमान स्वरुप की आड़ में हथियारों से लैस नाकाबपोश बदमाशों से एक्टिवा सवार TTE और उसके साथी की किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी जिसके चलते बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। वारदात के बाद बदमाशों की एक वीडियो भी वायरल हो रही है जिसमें बदमाश सरेआम पंजाबी गीत मित्रां नूं शौक हथियारां दा पर बीच सड़क में हथियार लहराते और नाचते दिखाई दे रहे हैं। मृतक के चाचा की शिकायत पर हत्या का केस दर्ज कर लिया है।

चांदनीबाग थाना पुलिस को दी शिकायत में हिम्मत सिंह ने बताया कि वह गांव उग्राखेड़ी का रहने वाला है। वह खेतीबाड़ी करता है। 5 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे वह निशान मार्केट नजदीक मलिक पेट्रोल पंप से अपने घर जा रहा था। जब वह गोयल मार्बल के नजदीक पहुंचा तो उसे एक हनुमान स्वरुप झांकी दिखाई दी। जिसमें काफी नौजवान युवक शामिल थे। उन लड़कों में से 6-7 लड़के झगड़ा कर रहे थे। जब उसने नजदीक आकर देखा तो उनमें एक उसका भतीजा मनप्रीत मलिक व दूसरा युवक उसके ही गांव का मनीष था।

सभी 6-7 युवक अपने हाथों में लिए हुए चाकू, लाठी-डंडों से मनप्रीत और मनीष को मार रहे थे। देखते ही देखते आरोपियों ने भतीजे मनप्रीत के हाथ, कमर व छाती के पीछे वाले हिस्से में चाकू से कई वार किए। मनीष को भी चाकू और लाठी-डंडों से चोटें मारी। जब वह बचाव करने लगा तो एक आरोपी ने आवाज देकर कहा कि अरविंद गुज्जर अपने सभी साथियों को लेकर यहां से भाग, नहीं तो भीड़ उन्हें पकड़ लेगी। इतना सुनते ही सभी आरोपी मौके से हथियारों समेत फरार हो गए।

खून से लथ-पथ हालत में भतीजा भाग्य लक्ष्मी मार्बल के बाहर जमीन पर गिर गया था। हिम्मत सिंह ने भतीजे मनप्रीत और मनीष को संभाला। राहगीरों की सहायता से दोनों घायलों को नजदीक ही एक निजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनप्रीत को लगी गंभीर चोटों को देखकर रेफर कर दिया। मनीष को इलाज के लिए वहीं भर्ती कर लिया। मनप्रीत को वहां से बिशन स्वरुप कॉलोनी स्थित अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गांव उग्राखेड़ी के लोगों में इस वारदात के बाद से काफी रोष है। लोगों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक वे शव नहीं लेंगे। अगर प्रशासन ने जबरदस्ती कर उन्हें शव दे दिया तो वे शव को सड़क पर रखकर जाम लगाएंगे। मगर दाह-संस्कार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही करेंगे।

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