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Cough Syrup के बाद अब पेट साफ करने वाली दवा में भा मिला फंगस, सप्लाई पर पाबंदी

राजस्थान में कफ सिरप विवाद के बाद अब जयपुर के सरकारी अस्पताल में पेट साफ करने वाली दवा में फंगस मिलने से हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि यह दवा “इलेक्ट्रोलाइट लैक्टुलोज सॉल्यूशन” है, जिसे मरीजों को पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्या में दी जाती है। यह सिरप यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाई गई है। घटना जयपुर के जयपुरिया अस्पताल की है, जहां दवा वितरण केंद्र से एक मरीज को यह सिरप दी गई थी। मरीज के परिजन ने जब दवा का ढक्कन खोलकर कप में डाली, तो अंदर झिल्ली और फंगस जैसी परत नजर आई। यह देखकर परिजन घबरा गए और तुरंत अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना दी।

मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने फौरन कार्रवाई करते हुए इस दवा की सप्लाई रोक दी। अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि इस सिरप के लगभग 40 कार्टन हाल ही में अस्पताल में सप्लाई हुए थे। फिलहाल, सभी बैच को रोककर जांच के लिए भेजा जा रहा है। संदिग्ध बोतल का बैच नंबर CLS1324 बताया जा रहा है। यह जुलाई 2025 में निर्मित हुई थी और जून 2027 में इसकी एक्सपायरी डेट है।

घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इसमें मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनोद गुप्ता और जनरल मेडिसिन विभाग के डॉ. राजेंद्र वर्मा को शामिल किया गया है। कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि सिरप में वाकई में फंगस या झिल्लीनुमा पदार्थ मौजूद था। इसके बाद मामले को उच्च-स्तरीय जांच समिति को भेजा गया है ताकि उत्पादन और वितरण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सके।

अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में मरीज की सजगता ने बड़ा नुकसान होने से बचा लिया। उन्होंने कहा “अगर परिजन ने सिरप को सीधे पीने के बजाय ध्यान से न देखा होता, तो मरीज को गंभीर संक्रमण हो सकता था। मरीज की जागरूकता से बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है।” फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि अब तक किसी मरीज के बीमार होने या रिएक्शन की कोई शिकायत नहीं मिली है। फंगस की पहचान दवा के सेवन से पहले ही हो गई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, फंगस का विकास तब होता है जब दवा निर्माण या स्टोरेज के दौरान नमी या संक्रमण का असर हो जाए। दवाओं में यह समस्या खराब पैकेजिंग, अत्यधिक गर्मी, या अनुचित भंडारण के कारण भी हो सकती है। लैक्टुलोज सिरप जैसी मीठे घोल वाली दवाओं में फंगस जल्दी फैलती है क्योंकि उनमें शुगर बेस मौजूद होता है जो सूक्ष्म जीवाणुओं के लिए उपयुक्त वातावरण बनाता है।

जिस दवा में फंगस पाया गया, वह यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड कंपनी की बनी है। कंपनी पहले भी कई सरकारी आपूर्तियों में शामिल रही है। हालांकि, अब यह जांच की जा रही है कि उत्पादन इकाई से ही फंगस आया या स्टोरेज में दवा खराब हुई। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (RMSC) से जुड़ी टीम ने भी इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी है।

जयपुरिया अस्पताल प्रशासन ने सभी मरीजों और परिजनों से अपील की है कि अगर किसी को इस तरह की संदिग्ध या खराब दवा दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल को सूचित करें। राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि “जन औषधि केंद्रों और सरकारी अस्पतालों में वितरित सभी दवाओं की जांच और सैंपलिंग बढ़ाई जाएगी।”

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित किया है कि मरीज की सजगता और जागरूकता सबसे बड़ी सुरक्षा है। सरकारी अस्पतालों में रोजाना हजारों दवाएं वितरित होती हैं। ऐसे में अगर हर मरीज दवा लेने से पहले उसकी गंध, रंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे, तो कई दुर्घटनाएं टाली जा सकती हैं।  

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