हरियाणा में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। अब केवल उन्हीं बच्चों को कक्षा-1 में प्रवेश मिलेगा, जो छह वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। सरकार ने यह कदम बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को अधिक मजबूत और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उठाया है।

हालांकि सरकार ने अभिभावकों को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण छूट भी दी है। जिन बच्चों की आयु 30 सितंबर तक छह वर्ष पूरी हो जाएगी, वे भी प्रवेश के पात्र होंगे। यानी हरियाणा निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2011 के तहत छह महीने की विस्तारित अवधि में जैसे ही बच्चा छह साल का होगा, उसी दिन से उसे पहली कक्षा में दाखिला मिल सकेगा।

इस बदलाव के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम-2003 में संशोधन करते हुए नए नियम अधिसूचित किए गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा (संशोधन) नियम 2026 को लागू करने की औपचारिक घोषणा की है। इससे पहले पांच साल की उम्र में भी पहली कक्षा में प्रवेश का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर छह साल कर दिया गया है।

यह बदलाव नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है, जिसमें कक्षा-1 के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित की गई है। हरियाणा में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। पहले 2024-25 में पांच वर्ष, फिर 2025-26 में साढ़े पांच वर्ष और अब 2026-27 सत्र से छह वर्ष की आयु अनिवार्य कर दी गई है।

अब 6 साल से कम उम्र के बच्चों का कक्षा-1 में सीधे दाखिला नहीं हो सकेगा। 30 सितंबर तक 6 साल पूरे करने वाले बच्चों को प्रवेश की पात्रता मिलेगी। प्री-प्राइमरी/केजी कक्षाओं में एक साल का अतिरिक्त समय बिताना पड़ सकता है। शिक्षा प्रणाली में आयु के अनुसार समानता और सीखने की गुणवत्ता बेहतर होने की है।

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