
गुरुग्राम के हाई-प्रोफाइल युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव की पहचान और अंतिम संस्कार से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इसी बीच पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) की कार्यप्रणाली में भी बदलाव किया गया है। पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और घटनास्थल पर पहुंचने की प्रक्रिया को नए तरीके से व्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
बहन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने गुरुग्राम पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि शव बरामद होने के बाद उसकी जानकारी इंटर-स्टेट पुलिस डेटाबेस ‘जिपनेट’ (ZIPNET) पर अपलोड नहीं की गई।
याचिका के मुताबिक, इस वजह से परिवार को शव की पहचान करने का अवसर नहीं मिल पाया और पुलिस ने शव को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
देशभर में SOP बनाने की मांग
याचिका में लापता लोगों और अज्ञात शवों की बरामदगी से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई के लिए एक प्रभावी और स्पष्ट देशव्यापी कानून या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नरों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। मामले में अब पुलिस की कार्रवाई, शव की पहचान की प्रक्रिया और रिकॉर्डिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो रही है।
इस मामले में जांच अधिकारी सहायक सब-इंस्पेक्टर साहून खान को पहले ही तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा चुका है। उन पर आरोप है कि अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान कराने के प्रयास और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस की जांच में अब अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एएसआई के निलंबन के बाद बादशाहपुर थाना प्रभारी, पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े अधिकारी और फॉरेंसिक टीम के दो अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। इन अधिकारियों पर कार्रवाई का फैसला जांच में सामने आने वाली जिम्मेदारी और लापरवाही के आधार पर लिया जा सकता है।
जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और सूचना संबंधित रिकॉर्ड में समय पर क्यों दर्ज नहीं की गई
युवराज हत्याकांड के बाद पुलिस ने अज्ञात शवों की बरामदगी और उनकी पहचान की प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। अब जिले में मिलने वाले प्रत्येक अज्ञात शव से जुड़े मामले की निगरानी के लिए एसीपी (हेडक्वार्टर) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इसके साथ ही क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी इस व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। यह अधिकारी सीधे डीसीपी (क्राइम) को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
नई व्यवस्था के तहत अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान, रिकॉर्ड तैयार करने और संबंधित प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी स्तर पर देरी या लापरवाही की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके।
अज्ञात शव मिलने पर गुरुग्राम कंट्रोल रूम को दिल्ली पुलिस के साथ फरीदाबाद, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और पलवल के कंट्रोल रूम से संपर्क करना होगा। शव की फोटो, हुलिया और उपलब्ध जानकारी तुरंत साझा की जाएगी। इसका उद्देश्य दूसरे जिले या राज्य में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से मिलान कर पहचान जल्द करना है।
पुलिस कंट्रोल रूम की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और मौके पर पहुंचने के रिस्पॉन्स सिस्टम को नए तरीके से व्यवस्थित किया जा रहा है। पुलिस का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अज्ञात शव मिलने के बाद सूचना और कार्रवाई किसी एक स्तर पर रुक न जाए।
इस मामले में डीसीपी (साउथ) आयुष यादव के अनुसार, लापरवाही और चूक के लिए इंस्पेक्टर तथा फोरेंसिक यूनिट से जुड़े अधिकारियों समेत कम से कम पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ अगले एक-दो दिनों में कार्रवाई की जा सकती है। मामले के जांच अधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
वहीं, शव के पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टर की भूमिका को लेकर भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने मौत की संभावित वजह डूबना बताई थी। इस संबंध में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए सिफारिश भेजी जाएगी।
