सावन के महीने के साथ हरियाणा में कांवड़ यात्रा पूरे उत्साह के साथ जारी है। सड़कों पर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच इस बार कई अनोखी कांवड़ यात्राएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं। कोई मुख्यमंत्री नायब सैनी को प्रधानमंत्री बनने की मन्नत लेकर कांवड़ ला रहा है, तो कोई 551 लीटर गंगाजल से 300 बीमार गोवंशों का स्नान कराने का संकल्प लेकर हरिद्वार से पैदल यात्रा कर रहा है।
CM सैनी को PM बनाने की मन्नत
पानीपत के ऊंटला गांव निवासी विलासराज अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी कांवड़ पर भगवान भोलेनाथ और मुख्यमंत्री नायब सैनी की तस्वीर लगाई है। विलासराज का कहना है कि वह मुख्यमंत्री नायब सैनी को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। इसी मन्नत के साथ वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर 11 अगस्त को चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचेंगे।
20 दिन की पैदल यात्रा
विलासराज ने बताया कि उन्होंने 23 जुलाई को हरिद्वार से यात्रा शुरू की थी। पानीपत तक उनके साथ कई कांवड़िए थे, लेकिन चंडीगढ़ तक का सफर वह अकेले तय करेंगे। वह मजदूरी करते हैं और कहते हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची नौकरी देने की पहल से वे प्रभावित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार को किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला, फिर भी लाडो लक्ष्मी योजना और बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाने जैसे फैसलों की वे सराहना करते हैं।
551 लीटर गंगाजल से 300 गायों का स्नान
चरखी दादरी के बधवाना गांव निवासी जोनी सैन भी अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा के कारण चर्चा में हैं। जोनी हरिद्वार से 551 लीटर गंगाजल लेकर आ रहे हैं। उनका उद्देश्य इस गंगाजल से अपनी गोशाला में रह रहे करीब 300 बीमार और बेसहारा गोवंशों को स्नान कराना है।
गोवंश सेवा का संदेश
जोनी ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ महेंद्रगढ़ में गोशाला चलाते हैं, जहां घायल और बीमार गोवंशों का इलाज किया जाता है। उन्होंने 50-50 लीटर के कई कैनों में गंगाजल भरकर उन्हें एक ट्रॉली पर सजाया है, जिसे रस्सी के सहारे खींचते हुए हरिद्वार से दादरी तक ला रहे हैं।
कांवड़ पर उन्होंने गोवंशों के पोस्टर भी लगाए हैं, ताकि लोगों में पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े।
गाय को ‘माता’ का दर्जा देने की मांग
जोनी का कहना है कि सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंशों की हालत बेहद खराब है। उनका मानना है कि यदि गाय को राष्ट्रीय स्तर पर ‘माता’ का दर्जा मिले तो उनकी सुरक्षा और देखभाल बेहतर हो सकेगी।
सावन की इस कांवड़ यात्रा में जहां एक ओर आस्था दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संदेश, जनसेवा और व्यक्तिगत संकल्प भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
