रोहतक, 14 अप्रैल। डा. भीमराव अंबेडकर का राष्ट्र निर्माण में योगदान वास्तव में अमूल्य और ऐतिहासिक है। वे केवल भारतीय संविधान के निर्माता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी विचारक, समाज सुधारक,अर्थशास्त्री, सामाजिक-आर्थिक न्याय और मानवाधिकारों के सजग प्रहरी थे। यह उद्गार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने आजएमडीयू के डा. बी.आर. अंबेडकर हॉल में संविधान निर्माता डा. अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रममें व्यक्त किए। प्रारंभ में कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने डा. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, साहस और सिद्धांतों की मिसाल है। डा. अंबेडकर का योगदान केवल दलितों एवं पिछड़ों को आरक्षण दिलाने के ही नहीं था, अपितु उन्होंने भारतीय संविधान में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित किए, ऐसा कुलपति का कहना था। उन्होंने भारत रत्न डा. अंबेडकर के विचारों को साझा करने, मंथन करने और जीवन में आत्मसात करे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के पदचिह्नों पर चलते हुए युवा देश एवं समाज के विकास में अपना योगदान दें और बाबा साहेब के बारे में और ज्यादा जानें।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने इस अवसर पर स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर तीन फेलोशिप दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा विश्वविद्यालय अनुसंधान छात्रवृति के अलावा, कानून, पत्रकारिता एवं अर्थशास्त्र विषय के जो शोधार्थी बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर से संबंधित शोध करेंगे, उन्हें विशेष विश्वविद्यालय अनुसंधान छात्रवृति देने का प्रावधान किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के गोल्डन जुबली वर्ष में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से संबंधित राष्ट्रीय स्तर पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, वाद विवाद प्रतियोगिता, और निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जाएगा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ए.एस. मान ने भारत रत्न डा. बी.आर. अंबेडकर के जीवन एवं विचारों पर प्रकाश डाला। डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा ने स्वागत भाषण दिया। विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र सिंह ढुल ने कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया। विधि विभाग की छात्रा अंकिता ने डा. अंबेडकर के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया। छात्र कल्याण विभाग के नरेश अहलावत ने मंच संचालन किया। निदेशक युवा कल्याण डा. प्रताप राठी ने कार्यक्रम का समन्वयन किया।
इस अवसर पर डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ए.एस. मान, डीन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट प्रो. एस.सी. मलिक, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा, डीन सीडीसी प्रो. विनीता हुड्डा, डीन सोशल साइंसेज प्रो. सेवा सिंह दहिया, प्रॉक्टर प्रो. राजेश पुनिया, लाइब्रेरियन डा. सतीश मलिक, विधि विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र सिंह ढुल, हरियाणा अध्ययन केन्द्र के निदेशक, प्रो. एस. एस. चाहर, एमडीयू-सीपीएएस, गुरुग्राम के निदेशक प्रो. प्रदीप अहलावत, सीडीएस निदेशिका प्रो. प्रतिमा देवी, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डा. राजेश कुमार, वाईआरसी कोऑर्डिनेटर प्रो. अंजू धीमान, चीफ कंसल्टेंट यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रो. राजकुमार, प्रो. जसवंत सैनी, प्रो. योगेन्द्र सिंह, प्रो. अनुसूया यादव, प्रो. नीलम कादयान, प्रो. संजय नांदल, प्रो. रामफूल ओहल्याण, डा. सुरेन्द्र दहिया, डा. हरिओम, डा. गुरदयाल, डा. मंजू पंवार, डा. कर्मवीर श्योकंद, डा. सपना, डा. एकता, डा. शैरी, डा. नीतू, उप निदेशक जनसंपर्क डा. नवीन कुमार, वित्त अधिकारी मुकेश भट्ट, कार्यकारी अभियंता जेएस दहिया, सहायक कुलसचिव श्याम सुंदर, खैराती लाल, जितेन्द्र परमार, समेत शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
