हरिद्वार, 5 अक्टूबर 2026। पितृपक्ष के पावन अवसर पर पितरों की स्मृति, उनकी शांति एवं समाज में सेवा और सदाचार की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से माँ चंडिका देवी धाम, पावड़ा, हरिद्वार की ओर से परम पूज्य स्वामी रामानुज पवन जी के आदेशानुसार 8 अक्टूबर 2026 को हरिपुर कलां, गली नंबर-6, गंगाघाट क्षेत्र में विशेष भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
रामानुज पवन परिवार के प्रमुख शिष्य प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने बताया कि सनातन परंपरा में पितृपक्ष पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य एवं सेवा का विशेष अवसर माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं से माँ गंगा में स्नान के बाद पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण, दान-पुण्य तथा जरूरतमंदों को भोजन कराने का आह्वान किया गया है।
नशामुक्त समाज के लिए पितृपक्ष में विशेष संकल्प
इसी सेवा एवं जनजागरण अभियान के अंतर्गत सैन पीठाधीश्वर परम पूज्य स्वामी नरेश आनंद जी के नेतृत्व में चल रही नशा विरोधी यात्रा लुधियाना एवं गुरुद्वारा नानकसर पहुँची।
स्वामी नरेश आनंद जी ने गाँव-गाँव जाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया तथा उन्हें नशा छोड़ने और अन्य युवाओं को भी नशे से दूर रखने की शपथ दिलाई।
प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने कहा कि यदि कोई युवा नशा छोड़कर अपने जीवन को सही दिशा में ले जाता है, तो यह उसके परिवार और समाज के साथ-साथ उसके पितरों के प्रति भी एक सार्थक श्रद्धांजलि हो सकती है।
उन्होंने बताया कि नशा विरोधी यात्रा अटारी बॉर्डर से होते हुए नई दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर कूच करेगी, जहाँ भारत सरकार के समक्ष नशामुक्ति एवं नशे की तस्करी रोकने के संबंध में ज्ञापन/निवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए धार्मिक मान्यताओं में बताए गए उपाय
प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं के अनुसार पितृपक्ष में पितृ शांति के लिए श्रद्धापूर्वक कई उपाय किए जाते हैं—
- तर्पण एवं पिंडदान:
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल और कुश के साथ पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करने की परंपरा है। श्रद्धा से “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। - ब्राह्मण एवं जरूरतमंदों को भोजन:
अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने तथा पंचबलि की परंपरा के अनुसार गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों एवं देवताओं के निमित्त भोजन का अंश निकालने की परंपरा बताई गई है। - पीपल की पूजा:
धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल वृक्ष के समीप जल एवं काले तिल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक परिक्रमा की जा सकती है। - दान-पुण्य:
तिल, अन्न, वस्त्र, जल आदि का दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करने की परंपरा है। - भगवान शिव की आराधना:
पितृ शांति की कामना से भगवान शिव की आराधना एवं प्रार्थना करने की धार्मिक परंपरा भी प्रचलित है। - दक्षिण दिशा में दीपक:
पितृपक्ष के दौरान शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करने की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि घर में स्वच्छता रखना, रसोई में जूठे बर्तन न छोड़ना तथा सात्विक आचरण करना भी इस अवधि में महत्वपूर्ण माना जाता है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। पंचांग के अनुसार 8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध, 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी।
जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धापूर्वक तर्पण, श्राद्ध, भोजन एवं दान-पुण्य कर सकते हैं।
जरूरतमंद बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए सेवा भवन की योजना
प्रह्लाद कुमार अग्रवाल ने बताया कि हरिद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंद बच्चों को उचित एवं उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने तथा बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था के लिए सरकार के माध्यम से भूमि प्राप्त कर सेवा भवन बनाने की योजना है।
उन्होंने बताया कि इस सेवा कार्य के लिए बिहार में भूमि ली जा चुकी है तथा अन्य स्थानों पर भी भूमि लेने का प्रस्ताव है। उन्होंने धर्मप्रेमी एवं सेवाभावी लोगों से इस पुनीत कार्य में सहयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम लोगों का छोटा-सा सहयोग भी किसी बच्चे के भविष्य और किसी बुजुर्ग के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
नशा विरोधी यात्रा का प्रस्तावित मार्ग
नशामुक्ति एवं जनजागरण यात्रा का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे पानीपत के गोहाना मोड़ से किया गया।
यात्रा का प्रस्तावित मार्ग है—
पानीपत → घरौंडा → करनाल → कुरुक्षेत्र → अंबाला → चंडीगढ़ → मोरिंडा → समराला → लुधियाना → फगवाड़ा → जालंधर → करतारपुर → जंडियाला गुरु → अमृतसर → अटारी → तरनतारन → मोगा → बरनाला → मानसा → सिरसा → फतेहाबाद → अग्रोहा → हिसार → हांसी → बवानी खेड़ा → भिवानी → दादरी → महेंद्रगढ़ → नारनौल → अटेली → रेवाड़ी → पटौदी → गुरुग्राम → दिल्ली → जंतर-मंतर → सोनीपत → पानीपत।
यात्रा का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में नशे की समस्या एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जन-जागरूकता बढ़ाना, अटारी बॉर्डर पर नशे की तस्करी रोकने के लिए जागरूकता पैदा करना तथा भारत सरकार के समक्ष प्रभावी कदम उठाने का निवेदन प्रस्तुत करना है।
जनसहयोग का आह्वान
सनातन संस्कृति जागृति ट्रस्ट एवं माँ चंडिका हरिभावन आश्रम, हरिपुर कलां की ओर से नशामुक्ति एवं जनजागरूकता के इस अभियान में भक्तजनों, समाजसेवियों, सामाजिक संस्थाओं एवं सभी इच्छुक नागरिकों से सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया गया है।
सहयोग एवं संपर्क:
प्रह्लाद अग्रवाल
मोबाइल: 9818 375742
सहयोग करने के इच्छुक धर्मप्रेमी बंधु संपर्क कर यह बता सकते हैं कि वे किस प्रकार का सहयोग करना चाहते हैं।
निवेदक:
समस्त रामानुज पवन परिवार एवं सेवाभावी धर्मप्रेमीजन
जय माता दी • हर हर गंगे • राधे-राधे • जय गुरुदेव
नोट: पितृ दोष, श्राद्ध एवं पितृ शांति से संबंधित उपाय धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं एवं शास्त्रीय मतों पर आधारित हैं। इन्हें चिकित्सकीय या वैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत धार्मिक अनुष्ठान अथवा कुंडली संबंधी मार्गदर्शन के लिए संबंधित आचार्य/विशेषज्ञ से परामर्श लिया जा सकता है।
