अपनी बहन के साथ पानी के टब में खेल रही एक साल की मासूम बच्ची का सिर अचानक से पानी में डूब गया जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद बच्चे की परिजन तुरंत उसे सिविल अस्पताल में लेकर के पहुंचे जहां पर डॉक्टरों ने जब उसे बच्ची को सीपीआर दिया तो उसकी धड़कन वापस आ गई जिसके बाद अस्पताल में वेंटिलेटर ना होने के कारण उसे बच्ची को सिविल अस्पताल सोनीपत से रोहतक पीजीआई में रेफर कर दिया गया। रोहतक पीजीआई में दोपहर 2:00 से लेकर रात 9:00 बजे तक बच्ची के परिजन वेंटीलेटर के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन वेंटीलेटर नहीं मिला। इसके बाद जब यह बात मीडिया तक पहुंची पर यह मामला उछलने लगा तो आनंद-फानन में पीजीआई में उन्हें वेंटिलेटर दिया गया। लेकिन अफसोस तब तक उसे मासूम की जान जा चुकी थी।स्टाफ से लेकर डॉक्टर तक ने हाथ खड़े कर दिए। आखिरकार, वो मासूम बच्ची जो बोल भी नहीं सकती थी, जिसने अभी दुनिया देखी भी नहीं थी, उसने सिस्टम की बेरहमी के सामने दम तोड़ दिया।अब सवाल यह उठता है कि इस मौत के पीछे कौन जिम्मेदार है रोहतक पीजीआई प्रशासन या कोई और?
