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बाढ़ के बीच पैदा हुआ बच्चा , गांव ने नाम रख द‍िया ‘सैलाब सिंह’ बोले यही है असली हीरो

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में इन दिनों बाढ़ ने भारी तबाही मचाई हुई है। जिले के करीब 40 गांवों के 55 हजार लोग इस आपदा से प्रभावित हैं। गांवों की सड़कें, खेत, गलियां जगह सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। इसी मुश्किल हालात के बीच, एक गांव में एक नई ज़िंदगी ने जन्म लिया, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया और मुस्कुराने की वजह भी दे दी।

यह कहानी है बडेपुरा धरमा गांव की, जो बाढ़ से पूरी तरह घिर चुका है। यहां रहने वाली गर्भवती महिला प्रीति को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। आसपास हर तरफ पानी भरा हुआ था, रास्ता भी साफ नहीं था और हालात बहुत ही गंभीर थे। ऐसे में प्रीति के परिवार वालों ने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में फोन कर मदद मांगी, लेकिन वहां से साफ कहा गया कि “गर्भवती महिला को किसी तरह गांव से बाहर लाना होगा, तभी मदद मिल पाएगी।”

हालात को देखते हुए SDM नागेंद्र सिंह खुद मौके पर पहुंचे। वे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से गांव आए थे। उसी ट्रॉली में उन्होंने प्रीति और उसके परिजनों को बैठाया और बाढ़ के पानी से निकलकर गांव के बाहर लाया गया। लगभग तीन किलोमीटर तक ट्रॉली से चलने के बाद वो एक ऐसी जगह पहुंचे, जहां सड़क पर पानी नहीं था।

वहीं पर पहले से तैयार एंबुलेंस खड़ी थी, जिसने तुरंत प्रीति को अस्पताल पहुंचाया। वहां के बीसलपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दोपहर के वक्त उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।

बेटे के जन्म की खबर जब परिवार वालों को मिली, तो भावनाओं के बीच एक अनोखा नाम खुद-ब-खुद जुबां पर आ गया  “सैलाब सिंह।” यह नाम धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गया। बाढ़ जैसे संकट के बीच इस बच्चे ने सबके चेहरों पर मुस्कान ला दी। अब गांववाले प्यार से उसे ‘सैलाब सिंह’ कहकर बुला रहे हैं एक ऐसा नाम, जो उसकी जन्म परिस्थितियों को हमेशा याद रखेगा।

बडेपुरा गांव की तरह जिले के कई गांव जलमग्न हैं। लोग घरों में कैद हैं, खेत-खलिहान डूबे हुए हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त है। लेकिन ऐसे कठिन समय में ‘सैलाब सिंह’ की कहानी एक उम्मीद की किरण है, जो बताती है कि जीवन किसी भी परिस्थिति में रास्ता बना ही लेता है।

बाढ़ और संकट के बीच जन्मा यह बच्चा सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि पूरे गांव के लिए उम्मीद और हौसले का प्रतीक बन चुका है। उसका नाम  ‘सैलाब सिंह’ इस बात की याद दिलाता रहेगा कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, नई ज़िंदगी हमेशा रास्ता ढूंढ ही लेती है।

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