चंडीगढ़। हरियाणा में संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को आगामी सत्र के दौरान विधानसभा में विधायी कार्य प्रस्तुत करने की स्वीकृति देने का अधिकार भी दिया गया है।
इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर सभी प्रशासनिक सचिवों को जानकारी भेज दी गई है। सरकार के निर्णय के अनुसार, 26 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान सदन के समक्ष किसी भी विधायी कार्य को प्रस्तुत करने के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली जाएगी।
कैबिनेट बैठक में बाद में एजेंडे में जोड़ा गया प्रस्ताव
जारी पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधायी कार्यों की स्वीकृति देने के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव शुरुआत में कैबिनेट बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था। बाद में इसे एजेंडे में जोड़ा गया।
3 नवंबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री को 26 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान विधायी कार्यों की प्रस्तुति की स्वीकृति देने का अधिकार प्रदान किया गया। संबंधित प्रशासनिक विभाग को इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या होता है विधायी कार्य?
विधानसभा में विधायी कार्य का मतलब उन प्रक्रियाओं और गतिविधियों से है, जिनके जरिए कानून बनाए जाते हैं, उनमें संशोधन किया जाता है और सरकारी नीतियों पर चर्चा होती है।
इसमें मुख्य रूप से विधेयक पेश करना, उन पर चर्चा करना, संशोधन और मतदान के बाद उन्हें मंजूरी देना शामिल है। इसके अलावा प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, शून्यकाल और अध्यादेशों को सदन से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया भी विधायी कामकाज का हिस्सा होती है।
राज्य का बजट पेश करना, विभागों के खर्च के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान भी विधानसभा के विधायी कामकाज में शामिल हैं।
संविधान दिवस पर होगा विशेष सत्र
हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। इसी अवसर पर हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इस सत्र में सदन का कामकाज निर्धारित विधायी प्रक्रिया के तहत चलेगा।
