बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा हरियाणा
आज संयुक्त संघर्ष मोर्चा हरियाणा के आह्वान पर पूरे प्रदेश में बिजली कर्मचारी व अधिकारी पूर्ण रूप से हड़ताल में शामिल हुए। सभी कर्मचारियों और अधिकारियों ने एकजुट होकर राजीव गांधी विद्युत सदन, रोहतक के प्रांगण में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
धरने की अध्यक्षता संयुक्त रूप से संदीप गोयत, विकास दहिया, सुनील दहिया, प्रवीण तथा सोमवीर द्वारा की गई तथा मंच संचालन संदीप जांगरा द्वारा किया गया।
मोर्चा के शीर्ष नेताओं ने जनता से अपील की कि यह संघर्ष बिजली कर्मचारियों की अपनी किसी वेतन भत्ते की मांग को लेकर नहीं है, बल्कि गुरुग्राम और नूंह में HERC द्वारा 11 पावर कंपनी को दिए गए प्राइवेट पैरेलल लाइसेंस के विरोध में है।
आज सरकारी बिजली वितरण कंपनियों को एक यूनिट की लागत 6 से 7 रुपए के बीच पड़ती है, लेकिन उसके बावजूद प्रदेश के किसानों को ये कंपनियां 10 पैसे प्रति यूनिट और लाखों गरीब अंत्योदय घरेलू उपभोक्ताओं को ढाई रुपए प्रति यूनिट की सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराती हैं। क्योंकि गुरुग्राम जैसे औद्योगिक क्षेत्र से पूरे प्रदेश का 25% रेवेन्यू मिलता है। अगर यह पूरा मुनाफा एक निजी कंपनी को दे दिया जाएगा, तो सरकारी बिजली विभाग किसी भी सूरत में किसानों व गरीब उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं रहेगा। इसलिए यह लड़ाई केवल बिजली कर्मचारियों की नहीं, हर बिजली उपभोक्ता की भी है।
इस जन सरोकार को समझते हुए अनेक जन संगठन भी समर्थन देने पहुंचे:
संयुक्त किसान मोर्चा से इंद्रजीत सिंह, किसान मजदूर संघ से प्रीत सिंह, सुमित दलाल, हरकिशन, सीटू उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र धनखड़, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान कर्मवीर सिवाच, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान जोगेंद्र बल्हारा, रिठाल के सरपंच उम्मेद सिंह, एचएसवीपी विभाग के प्रधान जयभगवान, एसएफआई से छात्र नेता अमित पिलानिया, रिटायर्ड कर्मचारी संघ से जगपाल सांगवान, राजेंद्र फौगाट, रणवीर सिंह प्रधान भारतीय किसान सभा सहित अनेक जन संगठन व जनप्रतिनिधि। सभी ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का आश्वासन दिया।
धरने को संबोधित करते हुए मोर्चा की राज्य कमेटी के नेता देवेंद्र सिंह हुड्डा, सुनील पंवार, विजय हुड्डा, मनदीप शर्मा, धर्मराज कुंडू, रविंद्र हुड्डा ने सरकार को चेताया कि जब तक प्राइवेट पैरेलल लाइसेंस पूरी तरह से रद्द नहीं होता, बिजली कर्मचारी संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को बिजली अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत जनहित के मामले में HERC को निर्देश देने का पूरा अधिकार है। प्रदेश का बिजली कर्मचारी व उपभोक्ता मुख्यमंत्री से अपेक्षा करता है कि वह जनहित में अपने दायित्व को निभाते हुए अपनी शक्तियों का प्रयोग कर पैरेलल लाइसेंस को तुरंत रद्द करें।
अगर सरकार फैसला वापस नहीं लेती, तो संयुक्त संघर्ष मोर्चा 24 अक्टूबर को बैठक कर किसी बड़े आंदोलन का निर्णय लेने से भी पीछे नहीं
