हरियाणा को 4 मार्च 2026 से बीस-सतलुज लिंक (BSL) के माध्यम से लगातार पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को पत्र लिखकर इसका कारण बताने और तुरंत पानी छोड़ने की मांग की है। विभाग के अनुसार 4 मार्च से अब तक गेज रीडिंग शून्य रही है, जिससे स्पष्ट है कि हरियाणा को इस अवधि में BSL से कोई पानी नहीं मिला।
पत्र में कहा गया है कि BSL सिस्टम से पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद रहने के कारण हरियाणा को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल रहा। राज्य की जल आपूर्ति मुख्य रूप से ब्यास और सतलुज नदियों पर निर्भर है, इसलिए पानी की कमी का सीधा असर राज्य की जरूरतों और दिल्ली-एनसीआर की जल सप्लाई पर पड़ सकता है।

विभाग ने यह भी कहा है कि SYL से पानी का योगदान न होने के कारण हरियाणा वर्तमान सिस्टम से केवल 1.62 MAF पानी ही वहन कर पा रहा है। ऐसे में पानी की आपूर्ति में किसी भी तरह की कटौती राज्य के लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है। पत्र में BBMB से आग्रह किया गया है कि हरियाणा को उसका निर्धारित हिस्सा तुरंत जारी किया जाए और BSL सुंदर नगर के माध्यम से पानी की सप्लाई शून्य स्तर तक कम न होने दी जाए।
लेटर में बताया गया है कि 4 मार्च 2026 से BSL के माध्यम से हरियाणा को पानी की सप्लाई बंद है और लगातार गेज रीडिंग शून्य दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग ने इस संबंध में BBMB से स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में कहा गया है कि राज्य को अपने हिस्से का पानी कम मिलने की आशंका है। हरियाणा ब्यास और सतलुज नदियों के पानी पर काफी निर्भर है और SYL न बनने के कारण इसकी क्षमता पहले से सीमित है। पानी की कमी का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर की जल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, बीएसएल के माध्यम से जल प्रवाह कम होने का कारण देहर पावर हाउस में तकनीकी दिक्कतें हैं, जो डायवर्जन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है। देहर परियोजना की छह टरबाइन में से केवल दो ही वर्तमान में चालू हैं, जिससे ब्यास बेसिन से सतलुज में जल का स्थानांतरण काफी सीमित हो गया है।
बीबीएमबी ने इस समस्या का कारण पुरानी अवसंरचना बताया है और कहा है कि चार दशक से अधिक पुराने देहर पावर हाउस को तुरंत मरम्मत की आवश्यकता है।
अधिकारियों के अनुसार, बीबीएमबी ने टरबाइनों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए परामर्श सेवाओं के लिए पहले ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) से संपर्क कर लिया है। मरम्मत और जीर्णोद्धार प्रक्रिया में समय लग सकता है, जिसके दौरान जल प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता सीमित रहेगी।
