रिटायर्ड सैनिकों के इलाज के लिए चलाई जा रही एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) में चंडीगढ़ में सामने आए बड़े फर्जीवाड़े में नया खुलासा हुआ है। सीबीआई जांच में पता चला है कि मरीजों को बिना जरूरत अस्पतालों में भर्ती दिखाया जाता था, उनके नाम पर फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए जाते थे और सरकार से भारी भरकम क्लेम वसूले जाते थे।

इस घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेक्टर-19 स्थित केयर पार्टनर हेल्थ सेंटर के बिल क्लर्क मनजीत सिंह के घर छापेमारी के दौरान सीबीआई ने 25 लाख रुपए नकद बरामद किए। आरोप है कि निजी अस्पतालों में मरीजों को गलत तरीके से रेफर कर बिना भर्ती किए ही लाखों रुपए के फर्जी बिल पास करवाए जाते थे।

इस मामले में चंडीगढ़ सीबीआई ने दो डॉक्टरों और बिलिंग क्लर्कों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एफआईआर में मंथन हेल्थकेयर के डॉक्टर विकास और डॉक्टर रिम्पल के साथ-साथ बिलिंग क्लर्क परवीन और मंजीत को नामजद किया गया है। सभी आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ECHS से जुड़े मरीजों को कागजों में निजी अस्पतालों में रेफर दिखाकर कई दिनों तक भर्ती दर्शाया जाता था, जबकि हकीकत में वे अस्पताल में भर्ती ही नहीं होते थे। इसके बाद इलाज, जांच और दवाइयों के नाम पर लाखों रुपए के फर्जी बिल तैयार कर योजना से भुगतान लिया जाता था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि फर्जीवाड़ा इतने बड़े स्तर पर किया जा रहा था कि सामान्य मरीजों को भी रिकॉर्ड में इमरजेंसी और आईसीयू में भर्ती दिखाया जाता था। कई मामलों में मरीजों को वेंटिलेटर पर दर्शाकर भारी-भरकम बिल बनाए गए।

इसके अलावा, कुछ मरीजों को बार-बार भर्ती दिखाकर उनके नाम पर फर्जी इलाज का रिकॉर्ड तैयार किया गया और फिर ECHS योजना के तहत क्लेम लगाकर मोटी रकम निकाली गई।

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