हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित IAS अधिकारी प्रदीप कुमार डागर को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार देर रात उन्हें पंचकूला की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 2 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया।

CBI को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस घोटाले में शामिल अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और IAS अफसरों के नामों का भी खुलासा हो सकता है। खास बात यह है कि बुधवार को ही प्रदीप डागर का सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का दिन था, लेकिन उससे पहले ही CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जांच से बच रहे थे, लोकेशन ट्रेस कर किया गिरफ्तार

CBI के मुताबिक, प्रदीप डागर लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और एजेंसी की पहुंच से बाहर थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे अंडरग्राउंड हो गए थे। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए भी याचिका दाखिल की थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी थी। इससे पहले ही CBI ने उनकी लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

अब तक 3 IAS अधिकारी गिरफ्तार

इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले में अब तक तीन IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले आरके सिंह और पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया था। अब प्रदीप डागर तीसरे IAS अधिकारी हैं, जिन्हें CBI ने इस मामले में गिरफ्तार किया है।

169 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप

CBI जांच में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के बैंक खातों में 169 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने खुलासा किया था कि एक IAS अधिकारी के निर्देश पर यह राशि चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में ट्रांसफर की गई थी।

प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव (Member Secretary) रहे थे।

504 करोड़ के घोटाले की जांच

CBI के अनुसार यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि फर्जी एफडी और शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया।

तत्कालीन चेयरमैन भी जांच के दायरे में

CBI सूत्रों के अनुसार बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी जल्द उनसे भी पूछताछ कर सकती है। प्रदीप डागर को सरकार ने 8 अप्रैल 2026 को परिवहन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव पद से निलंबित कर दिया था।

करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

प्रदीप डागर की संपत्ति के ब्यौरे में रोहतक और गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति दर्ज है।

  • रोहतक: 3,181 वर्ग गज जमीन, घोषित कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये।
  • गुरुग्राम: तीन महंगी संपत्तियां, जिनमें सेक्टर-28 के दो प्लॉट और एटलस प्लेटिनम टावर्स में लगभग 3.34 करोड़ रुपये का लग्जरी फ्लैट शामिल है, जो उनकी पत्नी के साथ संयुक्त स्वामित्व में है।

PMO स्तर पर हो रही मॉनिटरिंग

सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले की जांच की सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। CBI विभागवार जांच कर रही है और हर विभाग के बैंक ट्रांजैक्शन, जिम्मेदार अधिकारियों तथा लाभार्थियों की अलग-अलग पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि पूछताछ में इस घोटाले से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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