14 साल का मासूम आज अंगदान कर देगा कई लोगों को जीवनदान
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने परिवार का आभार जताते हुए बंधाया ढ़ाढस

रोहतक, 23 मई 2026। झज्जर जिले के एक 14 वर्षीय मासूम ने मौत के बाद भी जिंदगी की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसने पूरे समाज को अंगदान के प्रति जागरूक कर दिया। सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित हुए इस बच्चे के परिजनों ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल द्वारा प्रदेश में अंगदान को लेकर चलाई जा रही मुहिम से प्रभावित होकर अंगदान का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यदि सब सही रहा तो आज मासूम के हृदय, लीवर, किडनी, गुर्दे और दोनों कॉर्निया के दान से कई मरीजों को नया जीवन मिलेगा।

हादसे के बाद टूटी उम्मीदों को कुलपति ने दी नई दिशा
झज्जर जिले के गांव निवासी 14 वर्षीय मरीज घायल अवस्था में गत दिवस परिजन उसे पीजीआईएमएस रोहतक लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किया, लेकिन 21 मई को चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल के मार्गदर्शन में बनी डॉक्टर तरुण, डॉक्टर महिपाल और डॉक्टर अमरनाथ की कमेटी ने दो बार टेस्ट करने के पश्चात मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉ तरुण ने मरीज के ब्रेन डेड होने के पश्चात सोटो हरियाणा की टीम को दी। डॉ. अग्रवाल खुद चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल के साथ आईसीयू पहुंचे और गमगीन परिवार से मिले।

‘बेटा चला गया, लेकिन दूसरों जिंदगी दे सकता है’
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने परिजनों के पास बैठकर बेहद संवेदनशीलता से बात की। उन्होंने कहा कि आपका मासूम बच्चा अब लौटकर नहीं आएगा, यह कड़वा सच है। लेकिन उसका दिल किसी और बच्चे के सीने में धड़क सकता है। उसकी आंखें किसी को दुनिया दिखा सकती हैं। आपका बेटा भले ही चला गया, पर वह कई घरों का चिराग बन सकता है। अंगदान जीवन का सबसे बड़ा दान है। यह मौत पर जिंदगी की जीत है।

शुरू में परिवार हिचकिचाया, लेकिन मीडिया द्वारा अंगदान के प्रति जागरूकता की खबरें देखकर और काउंसलिंग टीम के समझाने के बाद परिवार अंगदान के लिए सहमत हो गया। डॉ. अग्रवाल ने परिवार को दिलासा देते हुए कहा कि आपके परिवार ने जो यह साहसिक निर्णय लिया है वह पूरे प्रदेश और देश में अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करेगा।अंगदान से दूसरों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल ने बताया कि काउंसलिंग के बाद पिता की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कांपती आवाज में कहा कि अगर हमारे बेटे की वजह से किसी मां की गोद सूनी होने, किसी का सुहाग उजड़ने से बच जाए, तो हम तैयार हैं। परिवार ने अंगदान की सहमति दे दी।

आज होगा अंगदान, ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचाए जाएंगे अंग
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि ब्रेन डेड कमेटी में निश्चेतना विभाग से डॉ. तरुण, सर्जरी विभाग से डॉ. महिपाल और न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. अमरनाथ को शामिल किया गया था। कमेटी ने सभी प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया। परिजनों की सहमति के बाद रविवार अंगदान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

नोटो की गाइडलाइन के तहत जरूरतमंद मरीजों की पहचान कर नियमों के अनुरूप उन्हें अंग अलोट होंगे। पुलिस-प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है।

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कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि 14 साल के मासूम बच्चे के परिजनों ने जो साहस दिखाया, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। लोग अक्सर भ्रांतियों के कारण अंगदान से डरते हैं। लेकिन झज्जर के इस परिवार ने साबित कर दिया कि जागरूकता हो तो मौत भी जिंदगी बांट सकती है।

उन्होंने बताया कि पीजीआईएमएस में पिछले दो महीनों में यह पांचवां अंगदान होगा। हमारा लक्ष्य हरियाणा को अंगदान में देश में अग्रणीय पंक्ति में लाना है। सोटो हरियाणा गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चला रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी मन की बात में अंगदान को बढ़ावा दिया है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान
पीजीआईएमएस के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर ने बताया कि भारत में हर साल 5 लाख लोगों की मौत अंग न मिलने से होती है। जबकि एक ब्रेन डेड व्यक्ति 8 से 9 जिंदगियां बचा सकता है। जरूरत सिर्फ जागरूकता की है। कुलपति महोदय खुद हर केस में परिवार से बात करते हैं। इससे भरोसा बनता है। डॉ तरुण दिन रात आईसीयू में मरीजों की सेवा करते हैं और मरीज के परिजन उन पर पूरा भरोसा करते हैं।

बॉक्स : समाज सेवी और धर्मगुरु देंगे श्रद्धांजलि
डॉ तरुण ने बताया कि इस मासूम को अंतिम विदाई देने के लिए कल दोपहर करीब 1:00 बजे ट्रॉमा सेंटर में शहर के समाजसेवी और धर्मगुरु उपस्थित होकर इस मासूम को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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