रोहतक, 15 मई। पीजीआईएमएस रोहतक से एक बार फिर मानवता की मिसाल सामने आई है। भिवानी जिले के 28 वर्षीय युवक को चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। गहरे सदमे के बीच परिजनों ने बुधवार देर शाम अंगदान के लिए अपनी सहमति दे दी। परिजनों की हामी के बाद कल सुबह 16 मई को अंगदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस निर्णय से लीवर, हार्ट, किडनी, कॉर्निया इत्यादि समेत कई अंग जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी देंगे।

जानकारी के अनुसार युवक को 13 मई को गंभीर सड़क हादसे के बाद परिजन गत दिवस पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में लाए थे। सिर में गंभीर चोट के कारण डॉक्टरों के अथक जीवनरक्षक प्रयासों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल के नेतृत्व में एनेस्थीसिया से डॉ तरुण यादव,न्यूरो सर्जरी से डॉ वरुण अग्रवाल और सर्जरी विभाग के डॉ सुरेंद्र वर्मा के बोर्ड ने दो बार एपनिया टेस्ट समेत निर्धारित प्रोटोकॉल पूरे कर उसे ब्रेन डेड घोषित किया।

ब्रेन डेड की सूचना मिलते ही सोटो हरियाणा की काउंसलिंग टीम परिजनों से मिली। शुरुआती दौर में परिवार इस निर्णय के लिए तैयार नहीं था। अपने जवान बेटे को खोने का गम इतना गहरा था कि वे कुछ भी सुनने-समझने की स्थिति में नहीं थे। सूचना मिलते ही कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल परिवार से मिलने स्वयं ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और परिजनों से बात की ओर उन्हें इस नेक कार्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि भिवानी जिले के इस परिवार ने बहुत बड़ा नेक काम किया है। उन्होंने परिजनों से कहा कि आपका बेटा अब वापस नहीं आ सकता, लेकिन इसका दिल किसी के सीने में धड़क सकता है। इसकी आंखें किसी को दुनिया दिखा सकती हैं। सबसे बड़े दुख में भी अगर हम किसी की जिंदगी बचा सकें तो इससे बड़ा पुण्य नहीं। डॉ. अग्रवाल ने करीब एक घंटे तक परिवार के साथ समय बिताया। उन्होंने अंगदान की पूरी प्रक्रिया, कानूनी पहलुओं और धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया। आखिरकार परिजनों ने भारी मन से, लेकिन दृढ़ निश्चय के साथ अंगदान के फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दिए।

कल होगा रिट्रीवल, बनीं टीमें
निदेशक डॉ एस के सिंघल ने बताया कि सोटो ने नियमानुसार रोटो पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ ,
नोटो नई दिल्ली को सूचना भेज दी गई है। नियमों के आधार पर अंगों का आवंटन होगा। पीजीआईएमएस में भी किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची के मरीज हैं। कॉर्निया यहां के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को दी जाएगी।
कल सुबह 6 बजे से रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू होगी। निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर के लिए जिला प्रशासन व पुलिस से समन्वय स्थापित कर लिया गया है।

डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि डॉ. अग्रवाल के प्रयासों से प्रदेश में अंगदान की क्रांति आई है। दो साल पहले तक हमारे यहां लोग अंगदान का नाम सुनकर ही डर जाते थे। आज स्थिति यह है कि ब्रेन डेड के अधिकतर मामलों में परिवार थोड़ी काउंसलिंग के बाद ही सहमति प्रदान कर रहे हैं। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे कुलपति महोदय डॉ अग्रवाल का विजन और सोटो हरियाणा की टीम की मेहनत है। नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह के नेतृत्व में सोटो हरियाणा बेहतरीन कार्य कर रहा है। पारदर्शिता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

क्या है ब्रेन डेड: दूर करें भ्रम
सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि आमजन में सबसे बड़ा भ्रम ब्रेन डेड को लेकर है। लोग इसे कोमा समझ लेते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ब्रेन डेड मृत्यु की कानूनी और चिकित्सकीय रूप से पुष्टि है। इसमें ब्रेन स्टेम डेथ होती है। वेंटिलेटर पर सिर्फ दिल कुछ घंटे या दिन धड़कता है, क्योंकि उसे मशीन से ऑक्सीजन मिल रही है। मशीन हटाते ही दिल की धड़कन रुक जाती है। ऐसे में अंगदान ही एकमात्र विकल्प है जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु को सार्थक बनाया जा सकता है।

एक डोनर, 8 जीवन
चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल ने बताया कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से करीब 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है। दो गुर्दे, लीवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय, छोटी आंत के अलावा कॉर्निया, त्वचा, हड्डी, हार्ट वॉल्व व नसें भी दान की जा सकती हैं। देश में हर साल करीब 5 लाख लोग अंगों के इंतजार में दम तोड़ देते हैं। हर 10 मिनट में इस सूची में एक नया नाम जुड़ जाता है।

परिवार की अपील: आगे आएं लोग
युवक के पिता ने रुंधे गले से कहा कि बेटा तो चला गया, पर कुलपति साहब ने समझाया कि इसका जाना बेकार नहीं जाएगा। अगर इसके अंगों से किसी मां का बेटा बच जाए, किसी बच्चे को पिता मिल जाए, तो हमारे बेटे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम चाहते हैं कि हमारे जैसे और परिवार भी यह कदम उठाएं। ओर युवक की पत्नी ने कहा कि उसका पति हमेशा देश की भलाई के लिए सोचता था और आज जाते जाते भी अपने देशवासियों के काम आ गया।


कुलपति की प्रदेशवासियों से अपील
डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि मैं हाथ जोड़कर हरियाणा के हर नागरिक से अपील करता हूं कि अंगदान का संकल्प लें। नोटो की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन प्रतिज्ञा करें और डोनर कार्ड डाउनलोड करें। मृत्यु अटल है, लेकिन अंगदान से हम उसे अमर बना सकते हैं। आपका दिल किसी की धड़कन बन सकता है। आपकी आंखें किसी का उजाला बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म अंगदान को महादान मानते हैं। शरीर से अंग निकालने के बाद पूरे सम्मान के साथ, बिना किसी विकृति के, शव परिजनों को सौंप दिया जाता है। अंतिम संस्कार पूरी तरह सामान्य तरीके से हो सकता है।
डॉ अग्रवाल के बताया कि कल जब इस 28 वर्षीय युवक के अंगदान की प्रक्रिया पूरी होगी, तो देश ओर वो का दीया जलाया जा सकता है।

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