बारिश के बीच घग्गर ने हरियाणा और पंजाब के कई गांवों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर कैथल में शनिवार को घग्गर का जलस्तर 24 फीट दर्ज हुआ जबकि खतरे का निशान 23 फीट है। हरियाणा के गुहला-चीका क्षेत्र के कई गांव घग्गर पार पंजाब की तरफ हैं।
हरियाणा सरकार ने इन गांवों में घग्गर का पानी आने से रोकने के लिए गांव टटियाणा के पास करीब 2 किलोमीटर तक पत्थर के जाल लगाकर बंध मजबूत किए गए, जबकि पंजाब सरकार की ओर से ऐसे इंतजाम नहीं किए गए।
पानी हरियाणा के गांवों के खेतों में भी पहुंचा, लेकिन यह अभी करीब एक फीट के आसपास ही है। जबकि सटे पंजाब के पटियाला जिले के गांवों में दो से ढाई फीट तक है। इससे पंजाब के धर्महेड़ी, थेह ब्राह्मणा, हरिपुर, शशि गुजरान गांवों के लोग इतने परेशान हैं कि उन्होंने हरियाणा में शामिल करने की मांग कर डाली।
इन गांवों लोगों को कहना है कि करीब 13 वर्ष पहले हरियाणा की सरकार ने गांव टटियाणा में हरियाणा-पंजाब के बॉर्डर पर घग्गर के दोनों तरफ पत्थर लगाकर तटबंधों को मजबूत कर दिया था, ताकि घग्गर के टूटने से किसी प्रकार की दिक्कतें आमजन को न झेलनी पड़ें। मगर, पंजाब की सरकारों की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
हालांकि अभी पंजाब और हरियाणा के घग्गर के साथ लगते गांवों में रिहायशी क्षेत्र में पानी नहीं आया है, लेकिन लोगों में भय का माहौल है। यही डर सता रहा है कि जाने कब पानी आ जाए और उनके आशियाने डूब जाएं। हरियाणा के कैथल में फसलों में घग्गर का पानी ओवरफ्लो होकर घुसने लगा है। टटियाणा, रत्ताखेड़ा, सिहाली, कल्लर माजरा, कड़ाम, सुगलपुर, बुढ़नपुर, पपराला, कसौली, बौपुर, कमहेड़ी, अरनौली व डंडौता में खेतों में करीब डेढ़ फीट तक पानी जमा हो गया है।
पंजाब के गांवों में पानी दो फीट से भी ज्यादा हो गया है। पंजाब के हरिपुर और धर्महेड़ी के खेतों में करीब दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। फसलें बिल्कुल डूब चुकी हैं। गांवों के लोग सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि फसलें तो खराब हो गईं, कम से कम उनको और उनके मवेशियों को बचाने के लिए तो कोई कदम उठाया जाए। घग्गर का जलस्तर बढ़ ही रहा है। ऐसे में लोगों को और ज्यादा डर सता रहा है।

