रोहतक नगर निगम के सदन में रिकॉर्ड 18 कमेटियों का मात्र दो मिनट में गठन कर दिया गया। मेयर रामअवतार वाल्मीकि का कहना है कि 25 पार्षदों में किसी को किसी कमेटी के चयन पर आपत्ति नहीं है। सभी ने सर्वसम्मति से उनको कमेटी गठन का अधिकार दिया था। उधर, पानी व सीवर को लेकर जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने अधिकारियों को घेरा और कार्यशैली पर सवाल उठाए। पिछले साल नगर निगम के चुनाव हुए थे, जिसमें मेयर के अलावा 22 पार्षद चुने गए। तीन पार्षदों रमेश बोहर, अशोक वर्मा व अनीता गर्ग को मनोनित पार्षद नियुक्त किया था। अब 11 अगस्त तक कमेटियां गठित करने रिपोर्ट मांगी गई थी। इसलिए रविवार के दिन सदन की बैठक बुलाकर कमेटियों का गठन किया गया है।
रोहतक नगर निगम की हाउस बैठक रविवार को जिला विकास भवन में एक बार फिर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के बिना ही करवाई गई। इससे पहले हुई दो बैठकों में भी ये महत्वपूर्ण पद रिक्त रहे थे। निगम की बैठक में कांग्रेस के 3 विधायक व एक सांसद भी नहीं पहुंचे और उनकी कुर्सियों को खाली छोड़ा गया।
नगर निगम की बैठक शुरू होते ही पार्षदों ने अपनी समस्याओं को गिनवाना शुरू कर दिया। किसी ने सीवरेज लाइन तो किसी ने कचरे के उठान को लेकर अपनी बात रखी। वहीं, पानी की सप्लाई को लेकर भी पार्षदों ने अधिकारियों से जवाब मांगा। ऐसे में जिन एजेंडों को लेकर मीटिंग बुलाई गई, पार्षद उन एजेंडों से भटकते हुए नजर आए।
मेयर के साथ सांसद दीपेंद्र हुड्डा, उसके बाद पूर्व सीएम व गढ़ी सांपला किलोई से विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रोहतक विधायक भारत भूषण बतरा व कलानौर विधायक शकुंतला खटक की कुर्सियों को डाला गया था। लेकिन इन चारों में से एक भी प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, जिसके कारण चारों कुर्सियों को खाली छोड़ा गया।
सीवरेज लाइन को लेकर कांग्रेस के पार्षद परीक्षित देशवाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सीवरेज की लाइन तो डाली गई है, लेकिन उनकी साफ सफाई नहीं करवाई जा रही। बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उधर, पार्षद डिंपल जैन ने भी सीवरेज सिस्टम को लेकर अपनी बात रखी।
बैठक के दौरान पहली बार निगम की मीटिंग में पहुंचे मनोनित पार्षदों ने भी मेयर रामअवतार वाल्मीकि व कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार ने एक करोड़ रुपए की ग्रांट मांगी, ताकि विकास कार्य करवा सके। बैठक के दौरान हाउस ने पास किया कि तीनों मनोनित पार्षदों को ग्रांट दी जाएगी।
मीटिंग की शुरुआत से लेकर आखिर तक पार्षदों ने सीवरेज व पानी को लेकर अधिकारियों को घेरने का काम किया। पार्षदों ने कहा कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जेई अक्सर रुखा सा जवाब देते हैं। जब उनके काम ही नहीं हो रहे तो किसके पास जाकर शिकायत करें। जलभराव की समस्या को लेकर भी पार्षदों ने अधिकारियों को घेरने को काम किया।
नगर निगम की बैठक में पार्षदों के स्थान पर उनके प्रतिनिधि सवाल पूछते हुए नजर आए। पार्षद पत्नी है और बैठक में मौजूद भी है, लेकिन उनके स्थान पर उनके पति ही मेयर व कमिश्नर से सवाल करते हुए नजर आए। लोगों की समस्याओं को पार्षदों के ज्यादा उनके प्रतिनिधियों ने रखी। यहां तक कि फोन की रिकार्डिंग तक सदन में सुनाई गई।
