महम (रोहतक)। एक लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर संदीप लोहार के पिता सतबीर का आरोप है कि बेटे को यूपी के बागपत की पुलिस रविवार शाम 8 बजे गांव से ले गई थी। बागपत से इंस्पेक्टर ने उन्हें फोन करके कहा था कि 10 लाख रुपये दे दोगे तो उसे छोड़ देंगे। रुपये नहीं दे सके तो मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी। वह रविवार को सीएम नायब सिंह सैनी से मिलेंगे।
महम इलाके के गांव भैणी महाराजपुर निवासी सतबीर ने संदीप लोहार के अंतिम संस्कार के बाद पत्रकारों के आगे यूपी और हरियाणा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। कहा, बागपत पुलिस ने संदीप के सीने में दो, कूल्हे और पैर में एक-एक गोली मारकर हत्या की है।
आरोप लगाया कि एक महीने से यूपी और हरियाणा पुलिस उसके पीछे पड़ी हुई थी। कोई दो लाख रुपये मांग रहा था, पांच लाख रुपये। इतने रुपये नहीं थे, इसलिए संदीप की हत्या कर दी। कहा, वह पुलिसकर्मियों की सच्चाई को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने रखकर न्याय की गुहार लगाएंगे।
पिता ने दावा किया कि संदीप बदमाश नहीं था। उसने कोई गलत कदम नहीं उठाया। उस पर मारपीट और कार टकराने जैसे चार मामूली मामले ही दर्ज थे। पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज करके जबरन बदमाश बना दिया।
सतबीर ने आरोप लगाया कि बागपत के एक इंस्पेक्टर ने संदीप को छोड़ने के बदले 10 लाख रुपये मांगे थे। इतने रुपये थे ही नहीं, जो दे पाते। इसी कारण बागपत पुलिस 8 बजे लेकर गई और 11 बजे मुठभेड़ की सूचना मीडिया को दे दी।
सतबीर ने आरोप लगाया कि संदीप ने कानपुर से कोई निकिल प्लेट चोरी नहीं की। वह दिल्ली में एक व्यक्ति से खरीदी थी। उस पर फर्जी चोरी का केस बना दिया। उन्होंने दावा किया कि ट्रक चलाने वाले दूसरे बेटे रमेश और कॉलेज में पढ़ रहे सबसे छोटे बेटे को भी फंसा दिया। सतबीर के मुुताबिक रेलवे का सामान चुराने का केस भी फर्जी लगाया गया, जबकि उसे मैंने ही खरीदा था।
सतबीर का आरोप है कि यूपी पुलिस के फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ महम पुलिस ने शिकायत लेने से मना कर दिया। यही नहीं, महम थाने के एक पुलिसकर्मी ने उनकी पुत्रवधू ज्योति से पर्चा दर्ज करने के लिए दो लाख रुपये मांगे। रुपये नहीं थे तो वह थाने से लौट आईं।
महम। संदीप लोहार का बारिश के दौरान पुलिस सुरक्षा में मंगलवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया। बागपत से पोस्टमार्टम के बाद शव रात में लाया गया था। परिजन ने रातभर शव को घर में रखा था।



