हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने भाजपा की उम्मीदवार बनने के बाद रोहतक की जिला परिषद की चेयरपर्सन मंजू हुड्डा की कुर्सी खतरे में आ गई है। मंजू हुड्डा के खिलाफ 14 में से 10 पार्षदों ने डीसी अजय कुमार को ज्ञापन देकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही है।

पार्षदों ने कहा कि मंजू हुड्डा करीब पौने 2 साल से जिला परिषद की चेयरपर्सन हैं। लेकिन 10 पार्षद उनकी कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। वे अपने पद से विश्वास खो चुकी हैं। 14 में से 10 पार्षद उनके खिलाफ अविश्वास लाना चाहते हैं। उन्हें जिला परिषद की चेयरपर्सन पद से हटाना चाहते हैं। डीसी अजय कुमार से कहा कि हरियाणा पंचायती राज एक्ट 1994 के तहत कार्यवाही की जाए।

जिला परिषद की चेयरपर्सन मंजू हुड्डा ने करीब 15 दिन पहले 5 पार्षदों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें डिबार कर दिया था। जिन पर जिला परिषद की मीटिंग में हंगामा करने व बदतमीजी करने का आरोप था। जिसके बाद चेयरपर्सन ने कार्रवाई की और पिछली मीटिंग में पांचों पार्षदों को अनुपस्थित घोषित करके आगामी एक मीटिंग से डिबार कर दिया। डिबार होने वालों में जिला परिषद के उपाध्यक्ष अनिल हुड्‌डा, वार्ड नंबर 8 के पार्षद धीरज, वार्ड नंबर 1 के पार्षद अमित रांगी, वार्ड नंबर 14 के पार्षद सोनू और वार्ड 11 की पार्षद दीपिका शामिल रही।

इन पार्षदों ने दिया अविश्वास प्रस्ताव

मंजू हुड्डा के पति राजेश सरकार गैंगस्टर रहे हैं। जो करीब 13 साल की उम्र में हत्या के केस में जेल गए थे और इसके बाद वे अपराध के दलदल में फंसे। हत्या सहित अन्य आपराधिक मामलों में उनके नाम आए। जिसके कारण करीब 20 साल तक जेल में रहे। फिलहाल मंजू हुड्डा का कहना है कि यह उनका (राजेश सरकारी) अतीत था और अब वे ऐसा कुछ नहीं करते। इधर, मंजू हुड्डा के पिता प्रदीप यादव हरियाणा पुलिस में डीएसपी रहे हैं।

पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए डीसी को एफिडेविट देने के बाद मंजू हुड्डा ने बयान जारी करते हुए कहा कि जिला परिषद मेरे परिवार की तरह ही है। जनहित में निर्णय लिए जाने चाहिए ना की राजनीतिक भावना से। उन्होंने विकास का संकल्प लिया है। पद रहे ना रहे। जनता के बीच हूं, रहूंगी और विकास कराया है और कराऊंगी। इस बारे में जनता, सरकार और प्रशासन सभी वास्तविकता से परिचित है और जनता के हित में उचित निर्णय लेने में सक्षम है।

पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए डीसी को एफिडेविट देने के बाद मंजू हुड्डा ने बयान जारी करते हुए कहा कि जिला परिषद मेरे परिवार की तरह ही है। जनहित में निर्णय लिए जाने चाहिए ना की राजनीतिक भावना से। उन्होंने विकास का संकल्प लिया है। पद रहे ना रहे। जनता के बीच हूं, रहूंगी और विकास कराया है और कराऊंगी। इस बारे में जनता, सरकार और प्रशासन सभी वास्तविकता से परिचित है और जनता के हित में उचित निर्णय लेने में सक्षम है।

बता दें कि मंजू हुड्डा वार्ड नंबर 5 से निर्दलीय चुनाव जीतकर आई और पार्षद बनी। जिला परिषद चेयरपर्सन की सीट महिला आरक्षित होने के कारण उन्हें निर्विरोध चेयरपर्सन चुना गया। चेयरपर्सन बनने के बाद वे भाजपा में शामिल हो गई। पिछली कई बैठकों से पार्षद उनका विरोध कर रहे थे और काफी हंगामा भी हुआ। अब भाजपा ने उन्हें पूर्व सीएम भूपेद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ गढ़ी-सांपला-किलोई से उम्मीदवार बनाया है।

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