हरियाणा के रोहतक स्थित PGIMS में मंगलवार को MBBS छात्रों ने प्रदर्शन किया। विद्यार्थी फाइनल ईयर की परीक्षा के पैटर्न में किए गए बदलाव का विरोध कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा कि परीक्षा पैटर्न के बदलाव का फैसला वापस लिया जाए, क्योंकि नए नियमों से अधिकतर विद्यार्थी फेल हो जाएंगे।

छात्र पंकज बिट्‌टू ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 27 जून को एक वेबीनार की। जिसके माध्यम से जानकारी दी है कि 2019 बेच जो MBBS के फाइनल ईयर में हैं। उनके फाइनल ईयर एग्जाम को रिप्लेस करते हुए राष्ट्रीय निकास परीक्षा (NEXT) लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अब उस परीक्षा के नियम जारी किए गए हैं। जो इस NEXT परीक्षा को देगा वह 2019 बेच पहला बेच होगा। संभवत: यह परीक्षा मई 2024 में आयोजित होनी है। फाइनल ईयर के विद्यार्थी अपने पढ़ाई के मध्य में हैं। 6 माह फाइनल ईयर के जा चुके हैं। इस टेस्ट में MBBS के सभी 19 सब्जेक्ट शामिल होने हैं। साथ ही इसके लिए केवल 6 माह का ही समय बचा है।

MBBS विद्यार्थियों की इतनी तैयारी भी नहीं है कि उस परीक्षा को पास कर पाएं। साथ ही परीक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक अंक लेने होंगे और इसमें नेगेटिव मार्किंग भी होगी। जबकि किसी भी क्वालीफाइंग परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। इस लिए 2019 बेच को NEXT परीक्षा से राहत दी जाए।

पंकज बिट्‌टू ने कहा अगर आगे जिस बेच पर भी यह परीक्षा लागू की जाती है, उसमें भी बदलाव की जरूरत है। सबसे पहले नेगेटिव मार्किंग बंद की जानी चाहिए। अब नियमों के अनुसार अगर कोई विद्यार्थी एक विषय में पास नहीं होता तो उसकी परीक्षा छह माह बाद होती। इसमें बदलाव करके जल्दी परीक्षा करवाई जाए। क्योंकि ऐसे में विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित होगा। अगर इस पैटर्न पर परीक्षा होती है तो अधिकतर 2019 बेच के विद्यार्थी परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि इसके लिए एनएमसी ने एक मॉक टेस्ट रखा है। जो 28 जुलाई को होगा। उस मॉक टेस्ट के लिए 2 हजार रुपए फीस रखी है। अगर एनएमसी यह एग्जाम व मॉक टेस्ट करवाना चाहती है तो इसके लिए विद्यार्थी 2 हजार रुपए क्यों दे। विद्यार्थियों के साथ यह लूट की जा रही है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव भी बनाया जा रहा है।

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