हरियाणा में शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला किया है। अब राज्य के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को एग्जाम के रिपोर्ट कार्ड नहीं मिलेंगे। स्किल कार्ड से उनकी योग्यता का मूल्यांकन किया जाएगा। इस कार्ड में बच्चों के संख्यात्मक कौशल (न्यूमेरिकल) और भाषा (लैंग्वेज) पढ़ने और लिखने में उनके योग्यता के स्तर को दर्ज किया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह रिपोर्ट कार्ड टीचर्स के लिए सत्र के अंत में अपने लेक्चर को डिजाइन करने और बच्चों के सुधार को रिकॉर्ड करने के लिए बेंचमार्क बन जाएगी।

राज्य के स्कूलों में इस नई व्यवस्था के जरिए शिक्षा विभाग बच्चों के विषयवार प्रगति और कमियों को ट्रैक कर उन्हें आने वाली कक्षाओं में दूर करेगा। इस आकलन के जरिए बच्चों की योग्यता को निखारने में शिक्षकों को मदद मिलेगी। शिक्षाविदों के अनुसार बच्चों की इस व्यक्तिगत जानकारी से बच्चों के भविष्य सुधार के लिए बेहतर होगा।

शिक्षा विभाग के इस फैसले को समझने के लिए इस उदाहरण को पढ़ना होगा। मान लीजिए कोई छात्र अंग्रेजी पढ़ सकता है, लेकिन धाराप्रवाह नहीं है। अंग्रेजी के कुछ शब्दों में उसे परेशानी आती है तो शिक्षक उसकी स्किल को अच्छे या औसत रूप में आंकेंगे। इसी तरह यदि छात्र हिंदी में अच्छा है तो इसका आकलन अच्छा या बहुत अच्छा के रूप में किया जाएगा।

एग्जाम के बाद मिलने वाले स्किल कार्ड को अगली कक्षा के शिक्षकों को पास किया जाएगा। इससे वह छात्र की व्यक्तिगत योग्यता और क्लास की औसत योग्यता के बारे में जान सकेंगे। शिक्षकों के लिए यह कार्ड बेंचमार्क के रूप में काम करेगा। इससे हर वर्ष में छात्रों में हुए सुधार को जानने में भी शिक्षकों के साथ ही अभिभावकों में मदद करेगा।

कोरोना काल में दो साल स्कूल बंद रहे। इसके बाद शिक्षा के स्तर को स्कूलों में सुधारने के लिए विभाग ने कई सर्वे कराए। सर्वे की आई रिपोर्टों के आधार पर विभाग ने यह बदलाव किया है। रिपोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य मिले थे, जिसके बच्चे के सुधार के लिए कुछ बिंदुवार बदलाव होने जरूरी बताए गए हैं।

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