नेपाल (Nepal Flood) में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की भीषण बाढ़ में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं। प्रशासन के सामने बरामद शवों की पहचान और सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती है।
यह आपदा बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई। भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे का तेज बहाव घाटी के कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में लेता हुआ नेपाल से चीन तक पहुंच गया। इस अभूतपूर्व बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और सैकड़ों लोगों की जान चली गई या वे लापता हो गए।
प्रारंभिक जांच में नेपाली वैज्ञानिकों ने बताया है कि बाढ़ की शुरुआत करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रसुवा के लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में हुए बड़े बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से हुई। इसका मलबा ल्हेंडे नदी में गिरा और फिर भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदियों में तेज बहाव के साथ आगे बढ़ा। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सामान्य ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) नहीं था।
चितवन के देवघाट जंगल में अज्ञात शवों को दफनाने के लिए सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं। पिछले दो दिनों में 196 शव दफनाए जा चुके हैं। लंबे समय तक पानी में रहने से कई शव खराब हो गए हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो रही है। हर शव को पहचान नंबर देकर उसका रिकॉर्ड रखा जा रहा है। बाद में DNA जांच के जरिए शवों की पहचान कर परिजनों को सौंपने की कोशिश की जाएगी। हजारों लोग अब भी लापता हैं, इसलिए यह प्रक्रिया बेहद अहम है।
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भेजी हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुंचकर काम शुरू कर चुकी है। यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए DNA सैंपल की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद करेगी। वहीं, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में नेपाल सेना के सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स में करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हुए हैं।
- नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 903 हो गई है, जबकि 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं।
- भारतीय और चीनी विशेषज्ञों की मदद से बचाव दल करीब आधा दर्जन बंद पड़ी हाइड्रोपावर सुरंगों में तलाश अभियान चला रहे हैं। इनमें त्रिशूली-3A परियोजना भी शामिल है।
- नेपाल की आपदा प्राधिकरण के अनुसार हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े 933 लोग लापता हैं। सुरंगों तक पहुंचने के लिए बचावकर्मी लगातार मिट्टी और चट्टानों का मलबा हटा रहे हैं।
- भारतीय सुरंग बचाव दल ने चिलिमे और लांगटांग के हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों में नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान चलाया। भारी मशीनों और जवानों की मदद से रातभर मलबा हटाने का काम जारी रहा।
- नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने बताया कि भारी मात्रा में जमा मलबे के कारण सुरंगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो रहा है।
- प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस घटना को “अभूतपूर्व और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा” बताया है। करीब 21,000 सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में जुटे हैं।
- रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक इस आपदा से 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन शवों को बरामद करने और उनकी पहचान करने में जुटा है।
इस आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हुआ है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक वहां 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग लापता बताए गए हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास करने और राहत एवं बचाव अभियान तेज करने का निर्देश दिया है।
