दादरी के शहीद जवान रवि प्रकाश का अंतिम संस्कार हो गया। 8 साल के बेटे देव ने उन्हें मुखाग्नि दी। ग्रामीण शहीद के पिता श्रकृष्ण सांगवान को भी संभालते नजर आए, इस दौरान 8 साल का पोता अपने पिता के बारे में पूछता रहा।
श्मशान घाट में देव को देखकर ग्रामीणों की आंखों में भी आंसू आ गए। पत्नी सुनीता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। घर की महिलाओं ने उन्हें संभाला। इससे पहले सेना के जवानों ने उन्हें गन फायर से सलामी दी।
सुबह आर्मी के वाहन में उनका पार्थिव शरीर रोहतक PGI से पैतृक गांव कासनी लाया गया। पड़ोसी गांव सांवड़ से कासनी के बीच करीब 8 किलोमीटर तिरंगा बाइक रैली निकाली गई। स्कूली बच्चे रोड किनारे खड़े होकर ‘रवि प्रकाश जिंदाबाद’ के नारे लगाते रहे।
रवि प्रकाश का मंगलवार को बेंगलुरु में एक्सरसाइज के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया था। रवि यहां एक प्रमोशन कोर्स करने गए थे, मंगलवार को कोर्स का आखिरी दिन था। इसके बाद वे हवलदार प्रमोट हो जाते।
गुरुवार सुबह रवि का शव पीजीआई रोहतक से गांव कासनी लाया गया। इस दौरान कासनी से करीब 8 किलोमीटर दूर पड़ने वाले गांव सांवड़ में सैकड़ों युवा बाइकों पर तिरंगा लगाकर उनका इंतजार करते रहे।
जैसे ही आर्मी का वाहन सांवड़ आया, युवाओं ने वीर शहीद के नारे लगाए। इसके बाद गांव तक तिरंगा रैली निकाली गई। रास्ते में स्कूल की बच्चे भी उनके सम्मान में सड़कों पर तिरंगा लेकर खड़े रहे।
रवि प्रकाश 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अब उनकी तैनाती राष्ट्रीय राइफल की 54 बटालियन में कश्मीर में थी। पिता श्रीकृष्ण सांगवान ने बताया कि करीब 2 माह पहले रवि घर से ड्यूटी पर गया था। फिलहाल वह बेंगलुरु में प्रमोशन कोर्स कर रहा था। पीटी के दौरान हार्ट फेल होने से निधन हो गया।
रविप्रकाश का बेटा देव 8 साल है। पत्नी सुनीता होममेकर हैं। पिता खेतीबाड़ी करते हैं जबकि मां नीलम गृहिणी हैं। बड़ा भाई दिनेश भी खेती बाड़ी करता है। इसकी बड़ी बहन प्रीति शादीशुदा हैं।
पिता का कहना है कि रवि की ट्रेनिंग का मंगलवार को लास्ट दिन था। सोमवार रात उसने वीडियो कॉल पर पत्नी, बेटे से बात की थी। बातचीत के दौरान रवि ने कहा था कि अब हवलदार बन जाऊंगा। हवलदार बनने के बाद वापस घर लौटना है। ट्रेनिंग सेंटर से मैसेज आया है, कागजी कार्रवाई के लिए बेंगलुरु बुलाया है।
