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हरियाणा मे 590 करोड़ बैंकिंग फ्रॉड, सुपरिटेंडेंट्स को मिले करोड़ों के तोहफे…पूछताछ में खुलासा, बिजनेसमैन के देश छोड़ने की आशंका

हरियाणा के बहुचर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंकिंग फ्रॉड मामले में गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। पंचायत विभाग के सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार के बाद अब मोहाली के सेक्टर-117 निवासी मनीष जिंदल को गिरफ्तार किया गया है।
मनीष जिंदल को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने 10 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने 5 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।

साजिश में सक्रिय भूमिका

जांच एजेंसी हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अनुसार, मनीष जिंदल न केवल साजिश रचने में शामिल था, बल्कि उसे अंजाम देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
सीडीआर रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वह मुख्य आरोपी बैंक मैनेजर रिभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय के लगातार संपर्क में था। डिजिटल डेटा विश्लेषण में उसके खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन भी सामने आए हैं।

अफसरों को फंसाने के लिए लग्जरी गिफ्ट

जांच में सामने आया है कि फर्जी कंपनी के जरिए अधिकारियों को फंसाने के लिए कैश, गोल्ड और लग्जरी गाड़ियों का सहारा लिया गया।
सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार को फॉर्च्यूनर गाड़ी के लिए 25 लाख रुपए दिए गए।

बेटी के खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए।

स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट कंपनी से 1.35 करोड़ रुपए अलग-अलग किस्तों में लिए गए।

बताया जा रहा है कि गुरुग्राम, हिमाचल, मोरनी और कालका के होटलों व फार्महाउस में प्राइवेट पार्टियों का आयोजन कर अधिकारियों को प्रभावित किया जाता था।

फर्जी कंपनी के जरिए खेल

फर्जी कंपनी “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” की मालकिन स्वाति सिंगला बताई जा रही है, जिसमें उसके भाई अभिषेक सिंगला की भी हिस्सेदारी है।
फंड को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर रियल एस्टेट और शेयर बाजार में निवेश किया गया। यह फ्रॉड IDFC First Bank की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़ा बताया जा रहा है।

विक्रम वधवा की तलाश

मामले में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा का नाम भी सामने आया है। एसीबी ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। आशंका है कि वह देश छोड़ चुका है।

ब्रॉकर की भूमिका में नरेश कुमार

जांच में सामने आया है कि सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार आरोपियों और अधिकारियों के बीच ब्रॉकर की भूमिका निभा रहा था। फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खातों से रकम निजी और व्यावसायिक खातों में ट्रांसफर की गई।
एसीबी का कहना है कि मामले में अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 590 करोड़ के इस घोटाले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

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