रोहतक में हुए भीषण अग्निकांड में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य के दौरान मलबे से अमन, सौरभ और कपिल के शव बरामद किए गए। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया था। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों को कई घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी। देर रात आग पर नियंत्रण तो पा लिया गया, लेकिन तब तक मौके पर मौजूद सामान और ढांचा पूरी तरह जलकर खाक हो चुका था।
आग बुझने के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए सर्च अभियान चलाया गया। इसी दौरान तीन युवकों के शव बरामद हुए, जिनकी पहचान अमन, सौरभ और कपिल के रूप में हुई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा हालात का जायजा लिया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। इस दर्दनाक हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और स्थानीय लोग मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
पूरा मामला:👇
रोहतक के डी-पार्क स्थित 10 दुकानों में लगी आग ने तीन लोगों की जान ले ली, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक हादसा था या फिर कई चूकों का नतीजा। शुरुआती जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से पांच ऐसे कारण सामने आए हैं, जिन्होंने आग को विकराल रूप देने में अहम भूमिका निभाई
फायर ब्रिगेड के पहुंचने में देरी, फायर एक्सटिंग्विशर का काम न करना, शटर गिरने से लोगों का अंदर फंस जाना, बाइकों के पेट्रोल से आग का और भड़कना तथा शोरूम में मौजूद रबर और कपड़े के भारी स्टॉक ने हालात को लगातार बदतर बनाया। यही वजह रही कि कुछ मिनटों में शुरू हुई आग ने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।गया।
पांच जिलों से बुलाए गए 70 फायर टेंडर
हादसे की गंभीरता को देखते हुए झज्जर, जींद, गोहाना, भिवानी और चरखी दादरी सहित कई जिलों से करीब 70 फायर टेंडर बुलाए गए। NDRF की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन अत्यधिक गर्मी और धुएं के कारण बचाव कार्य में कठिनाई आई।
सात घंटे बाद मिले शव
शाम करीब साढ़े छह बजे आग पर आंशिक नियंत्रण मिलने के बाद बचाव दल दुकानों के अंदर पहुंचा। सबसे पहले सौरभ का शव बरामद हुआ। इसके बाद अमन और कपिल के शव भी मलबे से निकाले गए।
मॉडल टाउन क्षेत्र में बिजली-पानी संकट
हादसे के बाद एहतियातन मॉडल टाउन क्षेत्र की बिजली और गैस सप्लाई बंद कर दी गई। इससे लोगों को खाना बनाने, पानी की सप्लाई और भीषण गर्मी में रहने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
11 वाहन भी जलकर राख
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगते ही लोग अपनी बाइक और स्कूटी सड़क पर छोड़कर भागने लगे। करीब 11 दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गए।
बड़ा सवाल
क्या फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या फायर ब्रिगेड समय पर पहुंची? और क्या तीन जिंदगियां बचाई जा सकती थीं? इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएंगे।
