रोहतक में विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा गेंहू व सरसों की खरीद जारी है। जिला की मंडियों व खरीद केंद्रों में अब तक की 104186 मीट्रिक टन गेंहू तथा 11955 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है। सरकार द्वारा गेंहू के लिए 2125 रूपए प्रति क्विंटल तथा सरसों के लिए 5450 रूपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है।
उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि जिला में अब तक 104186 मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की गई है, जिसमें से 6900 मीट्रिक टन कलानौर साईलो, 9410 मीट्रिक टन किलोई, 4009 मीट्रिक टन लाखनमाजरा, 4194 मीट्रिक टन मदीना, 14960 मीट्रिक टन महम, रोहतक मंडी में 34393 मीट्रिक टन, सांपला मंडी में 21216 मीट्रिक टन तथा सांघी मंडी में 9104 मीट्रिक टन गेंहू की खरीद हुई है। गत वीरवार को कलानौर साईलो द्वारा 876 मीट्रिक टन, लाखनमाजरा में 633 मीट्रिक टन, मदीना 509 मीट्रिक टन, महम मंडी द्वारा 911 मीट्रिक टन, रोहतक मंडी द्वारा 2853 मीट्रिक टन, सांपला मंडी द्वारा 5143 मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की गई।
अजय कुमार ने बताया कि जिला में अब तक 11955 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है। इसमें से कलानौर मंडी में हैफेड द्वारा 3847 मीट्रिक टन, महम मंडी में 5013 मीट्रिक टन, रोहतक मंडी में 1246 मीट्रिक टन तथा सांपला मंंडी में 1849 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है। गत वीरवार को जिला में 385 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई, जिसमें से कलानौर मंडी में 241 मीट्रिक टन, महम मंडी में 95 मीट्रिक टन, रोहतक मंडी में 29 मीट्रिक टन तथा सांपला मंडी में 20 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है।
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किसान फसल अवशेष को न जलाये, पशुओं के लिए चारा बनवाये
उपायुक्त अजय कुमार ने किसानों का आह्वïान किया है कि वे अपनी फसलों को साफ एवं सुखाकर मंडियों में लाए। किसान फसल अवशेषों को न जलाए। फसल अवशेषों से पशुओं के लिए चारा बनाकर चारे की कमी को दूर किया जा सकता है। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा जानमाल की हानि होनेे का अंदेशा बना रहता है। फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है तथा किसान के मित्र कीट भी नष्टï हो जाते हैं। जिला में फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
