Site icon Digital Bhoomi – Haryana's Leading News Plate form and Weekly Newspaper Get latest Haryana News

हरियाणा में ₹590 करोड़ का बैंक घोटाला…UHBVN के CFO अमित दीवान बर्खास्त


हरियाणा में सामने आए ₹590 करोड़ के बैंक घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने अपने चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अमित दीवान को बर्खास्त कर दिया है। उन पर बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी खाते खोलने और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन करने का आरोप है।

आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) समेत अन्य सरकारी एजेंसियों के खातों में अनियमितताओं, फर्जी ट्रांजेक्शन और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में की गई है। मामले की जांच पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने की थी, जबकि अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।


जेल में बंद हैं अमित दीवान

CFO अमित दीवान को 18 मार्च को ACB ने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल अंबाला सेंट्रल जेल में बंद हैं। आरोप है कि उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित एक निजी बैंक में गलत मंशा से खाते खुलवाए और मुख्य आरोपी के साथ मिलकर घोटाले को अंजाम दिया।


जांच में क्या-क्या सामने आया

  1. निजी बैंकों के जरिए लेनदेन
    जांच में सामने आया कि IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में खोले गए खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। एक खाते में करीब ₹50 करोड़ ट्रांसफर किए गए, जहां बाद में फर्जी एफडीआर और अनधिकृत ट्रांजेक्शन पाए गए।
  2. रिश्वत का आरोप
    दस्तावेजों के अनुसार संबंधित बैंक उस समय सरकारी पैनल में शामिल नहीं था, फिर भी नियमों को नजरअंदाज कर खाता खोला गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में करीब ₹50 लाख तक की रिश्वत दी गई।
  3. बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी
    आदेश में कहा गया है कि गंभीर आरोपों और चल रही आपराधिक जांच को देखते हुए नियमित विभागीय जांच करना व्यावहारिक नहीं है। इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका थी, इसलिए नियमों के तहत सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई।

बेटे की शादी के लिए मिली थी अंतरिम जमानत

करीब 18 दिन पहले अदालत ने अमित दीवान को बेटे की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। कोर्ट ने पासपोर्ट जमा कराने और ₹5 लाख के बेल बॉन्ड की शर्त भी रखी थी।


कई अधिकारियों पर गिरी गाज

3 फाइनेंस अधिकारी बर्खास्त
इस घोटाले में अब तक तीन अन्य सरकारी विभागों के फाइनेंस से जुड़े अधिकारियों को भी नौकरी से निकाला जा चुका है:

हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोलर राजेश सांगवान

हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड के कंट्रोलर रणधीर सिंह

विकास एवं पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार

नरेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी फर्म बनाकर सरकारी धन निकाला और निजी संपत्ति बनाई।

2 IAS अधिकारी सस्पेंड
मामले में 2011 बैच के IAS प्रदीप कुमार और 2012 बैच के IAS राम कुमार सिंह को भी सस्पेंड किया गया है। विजिलेंस जांच में दोनों के पास करोड़ों की संपत्ति मिलने की बात सामने आई है।


ED की छापेमारी, CBI की एंट्री

घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी एंट्री करते हुए चंडीगढ़ जोन के तहत 19 ठिकानों पर छापेमारी की है। अब CBI इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका खंगाली जा रही है।


कैसे हुआ ₹590 करोड़ का घोटाला?

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, हरियाणा सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने करीब ₹590 करोड़ की राशि निजी बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए जमा कराई थी। आरोप है कि बैंक अधिकारियों और अन्य आरोपियों ने इस रकम को FD में निवेश करने के बजाय निजी फायदे के लिए डायवर्ट कर दिया।

इस रकम को फर्जी कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट और शेयर बाजार में लगाया गया और बाद में फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से लेनदेन को छिपाने की कोशिश की गई।


मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

बैंक मैनेजर (मास्टरमाइंड): पूरे घोटाले की साजिश रचने का आरोप

रिलेशनशिप मैनेजर: अधिकारियों से संपर्क कर निवेश के नाम पर फंड जुटाया

फर्जी कंपनी संचालक: कंपनियों के जरिए पैसा डायवर्ट किया गया

सहयोगी सदस्य: रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में निवेश संभाला


आगे क्या?

CBI और ED की जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस घोटाले में और कौन-कौन अधिकारी या अन्य लोग शामिल थे।


Exit mobile version