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विजय दशमी 2021: घर में रावण के पुतले की लकड़ी रखना शुभ या अशुभ

माह की दशमी तिथि को पूरे भारतवर्ष में दशहरा विजय दशमी के रूप में मनाया जाता है। हमारी संस्कृति में बुराई के दो बड़े प्रतीक महिषासुर एवं रावण दोनों का वध इसी दिन किया गया था। इस कारण से विजयदशमी स्वयं में सिद्ध मुहूर्त है। वह अति शुभ दिन है, जिस दिन इतने शक्तिशाली होने के बाद भी इन दो आसुरी शक्तियों का नाश हुआ। दशहरे के दिन रावण के पुतले को जलाने का परिचालन बहुत वर्षों से चला आ रहा है। इस प्रकार समाज में संकेत दिया जाता है कि बुराई कितनी भी जटिल व शक्तिशाली हो उसका अंत अवश्य होता है।

दशहरे के दिन रावण का पुतला फूंकने के साथ-साथ एक और प्रचलन भी है। जिसमें जैसे ही पुतले की नाभि पर बाण चलाकर उसे आग लगाई जाती है, उस जलते पुतले की लकड़ियां लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड पड़ती है। ऐसी लोगों में भ्रांति है कि रावण के जले पुतले की लकड़ी घर में रखने से भय से मुक्ति मिलती है। ऐसा करना बिल्कुल भी शास्त्र संवत नहीं है। जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें ब्रह्म दोष और पितृदोष का प्रभाव भी पड़ता है। रावण एक अत्याचारी पापी व आसुरी शक्तियों का आचरण करने वाला व्यक्ति था परंतु यह भी सत्य है कि वह जन्म से ब्राह्मण परम ज्ञानी परम शक्तिशाली व शिव का अनन्य भक्त था। उसके शक्ति, ज्ञान, वीरता, राजनीति ज्ञान का कोई सानी नहीं था।


जब श्री राम ने रावण का वध किया तो अपने भाई लक्ष्मण को उनसे ज्ञान लेने के लिए कहा क्योंकि प्रभु राम भी जानते थे कि रावण के पास अमूल्य ज्ञान है। इतना ही नहीं पुराणों में यह भी वर्णन है कि जब प्रभु श्री राम ने रावण की हत्या की तो उन्हें ब्रह्म हत्या दोष लग गया था। तो भगवान राम ने ब्राह्मणों के कहने पर तमिलनाडु में रामनथपुरम में भी आपने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए सीता जी द्वारा बालू के शिवलिंग की पूजा अर्चना की। श्रीराम ने बालू से बने हुए उस शिवलिंग को तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थापित किया और उसकी पूजा-अर्चना की, जिसके बाद वे ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हुए। इस शिवलिंग को रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है।

अगर ब्रह्मा हत्या के दोष से भगवान भी नहीं बच पाए तो सोचिए उस ब्राह्मणों के स्वरूप को जलाने के बाद जो उसका अवशेष अगर घर में लाया जाए तो उसके शुभ परिणाम कैसे मिल सकते हैं। बल्कि ऐसा करने से कई अशुभ परिणाम मिलते हैं।

रावण के पुतले की जली लकड़ी घर में रखना पितृ दोष का भी कारण बनती है। लोग लकड़ी को रावण की अस्थियों के रूप में मानकर अपने घर में लाते है ,जिससे कि घर में किसी प्रकार का भय न रहे। किंतु ऐसा करना रावण के अवशेष को घर में स्थान देकर पूरा साल उसकी नकारात्मक ऊर्जा अपने घर में प्रवेश करवाने जैसा रहता है।

देह जलने के बाद उसकी राख को विसर्जित करने का प्रावधान है, जिससे कि उस व्यक्ति के जितने भी अवशेष बचे हैं, वह पंच भूतों में विलीन होकर सकारात्मकता की ओर बढ़ें परंतु यदि ध्यान से सोचिए आप अपने किसी प्रियजन की अस्थियां घर में रख लें तो उसका क्या प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। तो ऐसा करना बिल्कुल भी उचित तरीका नहीं है।

ऐसा देखा गया है कि जो लोग अपने घरों में लकड़ियां लाकर रखते हैं उन घरों में कलेश, दुख, संताप, अभिमान भाई-भाई में तकरार की स्थिति बनी रहती है।

रावण के समूह कुल का नाश हो गया था। उसके पुतले की लकड़ियां घर में रखने से संतान संबंधी कष्ट भी बने रहते हैं।

रावण परम ज्ञानी था, उसके ज्ञान को नमस्कार करना व उसके पुतले की पूजा करते समय उससे ज्ञान का वरदान मांगना बिल्कुल उचित है परंतु रावण के अवशेषों को अपने घर में रखना बिल्कुल भी शुभ नहीं है।

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